सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर में लगा कचरे का ढेर। संवाद
कठुआ। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में कचरे का ढेर बढ़ता रहा है। जगह-जगह लगने वाला कचरे का ढेर शहर में पानी निकासी व्यवस्था को बेपटरी कर रहा है। ऐसे में लोगों के बीमार होने का खतरा बढ़ने लगा है। लोगों का कहना है कि चारो तक जिस तरह गंदगी आलम है उससे निपटने के लिए प्रशासन को कदम उठाने की जरूरत है। स्थानीय वरिष्ठ नागरिक बोध राज शर्मा का कहना है कि शहर में पिछले दस दिनों से कचरा नही उठ रहा है। जगह-जगह लगे इस ढेरों पर हर रोज निकलने वाले कचरा डंप किया जा रहा है। उमय से भरी गर्मी के दस इस मौसम में हर रोज होने वाली बारिश से कचरे का ढेर सड़ने लगा है। जिससे उठने वाली बदबू पहले ही लोगों को परेशान कर रही है। अगर आने वाले एक दो दिनों में इसे हटाने के लिए कार्रवाई नही शुरू की गई तो लोगों के बीमार होने का खतरा बढ़ सकता है।
वहीं अमित कुमार का कहना है कि 21 वार्ड में फैले कठुआ शहर के आधे हिस्से में बरसात के मौसम में भूमिगत जलस्तर काफी ऊपर आ जाता है। वहीं, जलशक्ति विभाग द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइनों की स्थिति भी बहुत अच्छी नही कही जा सकती है। ऐसे कचरा और गंदगी हमारी रोज की जरूरत के पानी को भी दूषित कर सकता है, जो बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने का कारण बन सकता है। लिहाजा इससे निपटने की जरूरत है। क्योंकि गत वर्ष भी जिले में 750 से ज्यादा डेंगू और मलेरिया मामले सामने आए थे, अगर जलभराव होगा तो हमें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
कोट
डेंगू का मच्छर चूंकि साफ पानी में होता है और इसके मामले बरसात के बाद आते हैं ऐसे में हमें घबराने की जरूरत नही है। हालांकि गंदगी के कारण कई अन्य तरह की बीमारियां फैल सकती है, इस पर नजर रखी जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित टास्क फोर्स हर वार्ड में जा रही है। ताकि कियी भी तरह के संक्रामक रोग के मामले सामने आए तो उनसे निपटा जाए। इसके अलावा विभाग लगातार प्रशासन के संपर्क में है।
डॉ. विजय रैना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी