हीरानगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर संघर्ष विराम समझौते के बाद भले ही उस पार से बंदूकें खामोश हैं, लेकिन अब भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। बुधवार को पाकिस्तान का घिनौना चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ, जब आईबी पर उसकी ओर से भेजे गए एक नशा तस्कर को बीएसएफ के जवानों ने ढेर कर दिया और 27 किलो हेरोइन बरामद की।
देश के युवाओं की रगों में जहर घोलने के लिए पाकिस्तान पंजाब में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर कई बार नशा तस्करी को अंजाम दे चुका है। उसी तर्ज पर अब कठुआ जिला के हीरानगर सेक्टर में इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की फिराक में है। पानसर में पहली बार नशा तस्करी का असफल प्रयास किया गया। इससे पहले भी इस इलाके में पाकिस्तान ड्रोन के जरिए हथियार भेजने और सुरंग से घुसपैठ कराने के प्रयास कर चुका है।
इस बार जो कोशिश पाकिस्तान की ओर से की गई है, उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अब संघर्ष विराम का फायदा उठाते हुए वह इस इलाके में नशा तस्करी करना चाहता है। हालांकि बीएसएफ के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान किसी भी कोशिश में कामयाब नहीं हो सकता है। सीमा पर तैनात जवान पूरी तरह से सतर्क हैं और उनकी पैनी नजर से दुश्मन बच नहीं सकता है।
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गोलाबारी से ज्यादा खतरनाक है नशा तस्करी
हीरानगर सेक्टर के पानसर इलाके में पाकिस्तान की ओर से नशा तस्करी का यह पहला प्रयास है। इसे लेकर आम लोगों में भी दहशत है। लोगों में इस बात को लेकर चिंता है कि अब सीमा पर बंदूकें खामोश होने के बाद पाकिस्तान उनके बच्चों को नशे का शिकार न बना ले। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि पाकिस्तान पर कभी भी भरोसा नहीं किया जा सकता।
मानियारी के नायब सरपंच कुलदीप राज ने कहा संघर्ष विराम होने के बाद भी हमें भरोसा नहीं था कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आएगा। अब वही बात सच हुई है। उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह मजबूरी में बंदूकों के मुंह बंद कर सकता है, लेकिन दुश्मनी निभाने में कभी पीछे नहीं रह सकता है।
उन्होंने कहा पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली गोलाबारी तो हमें परेशान करती ही रही है, लेकिन अब जो वह इस इलाके में नशा तस्करी जैसे प्रयास कर रहा है, वह गोली से भी खतरनाक है। अगर वह अपनी कोशिश में कामयाब हो जाता, तो कई नौजवानों को इसका नुकसान झेलना पड़ता। उन्होंने बीएसएफ की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस पार उनका कौन वह समर्थक है, जिसे यह नशे की खेप भेजी जानी थी, उसकी तलाश जल्द की जानी चाहिए। समाज को नशे से बचाने के लिए इस तरह की काली भेड़ों को सामने लाना बेहद जरूरी है।