कठुआ। भीषण गर्मी के सीजन में जिले के अधिकांश इलाकों में पेयजल संकट बढ़ गया है। हालात यह हैं कि जल शक्ति विभाग 50 फीसदी तक पानी की मांग को भी पूरा नहीं कर पा रहा।
शहरी इलाकों में जहां जलस्तर का गिरना इसका बड़ा कारण है, वहीं ग्रामीण इलाकों में बदतर हालात के लिए कम वोल्टेज जिम्मेदार हैं। नतीजतन, शहर और कस्बों में मांग और जरूरत से आधी सप्लाई हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और बुरे हैं, जहां कई कई दिनों बाद पानी की सप्लाई मिल रही है। यही वजह है कि पिछले डेढ़ सप्ताह से आए दिन पानी को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं।
कठुआ शहर की लगभग एक लाख आबादी को 28 लाख गैलन पानी की जरूरत प्रतिदिन है। गर्मी में हालात ऐसे बन गए हैं कि मात्र 14 लाख गैलन पानी ही शहर के लोगों को नसीब हो रहा है। गर्मी बढ़ने से भू जलस्तर गिर गया है, जिससे पंपिंग स्टेशन मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है। इसलिए, जिन इलाकों में जहां आधा घंटा पानी की सप्लाई होती थी, वहां अब दस मिनट तक ही हो पा रही है। जिन इलाकों में रोजाना पानी मिलता था, वहां अब दूसरे या तीसरे दिन पानी की सप्लाई की जा रही है।
उधर, हीरानगर कस्बे में दो लाख गैलन पानी की जरूरत है। भू जलस्तर इन इलाकों में बेहतर है, लेकिन कम वोल्टेज के चलते जल शक्ति विभाग की ओर से की जानी वाली पेयजल सप्लाई आधी रह गई है। यहां सिर्फ एक लाख गैलन पानी ही मुहैया कराया जा रहा है।
बिलावर में तीन लाख गैलन के मुकाबले पंपिंग दो लाख गैलन की ही हो पा रही है। बसोहली में तीन लाख गैलन क्षमता है, लेकिन 1.28 लाख की ही आपूर्ति हो रही है। इन इलाकों में कम वोल्टेज और बिजली कटौती बड़ी वजह है।
जल जीवन मिशन को लेकर पिछले दो साल से हो रहे वादे और बनाई जा रही योजनाएं भी अब तक हाशिए पर हैं। ऐसे में विभाग के पास समस्या लेकर आने वाले लोगों को जल जीवन मिशन का ढांडस बांधकर लौटा दिया जाता है।
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कंडी के इलाकों में सबसे अधिक दिक्कत
एक लाख की आबादी पानी की बूंद बूंद को तरसी
पिछले बीस दिनों से मोटर पंप नहीं चल रहे हैं, जिसका मुख्य कारण कम वोल्टेज है। पहले जहां दस से पंद्रह घंटे पंप चलते थे, वे अब रात के 12 बजे से अगले तीन-चार घंटे तक ही चल पा रहे हैं। पेयजल समस्या की एक बड़ी वजह यह भी है कि बरनोटी ब्लॉक में सौ से अधिक हैंडपंप खराब हैं। केंद्रीय मंत्रियों से लेकर उपराज्यपाल के समक्ष भी समस्या रखी गई है लेकिन कंडी इलाका पानी को त्रस्त है। हालात यह हैं कि उज्ज दरिया से घोड़ों और ऊंटों पर लादकर लोग पानी घरों को लेकर जाते हैं। जुथाना, लाहड़ी, टेड़ा, जोहड़, पलाल, मोटा, सुफैन, मस्तगढ़, चीला, चंगार, मलामन और बोहड़ा, बड़ा नाल, बिंदल, डूंगा, फरल पलेल, आदि में घोड़ों और ऊंटों से पानी की सप्लाई हो रही है। इन इलाकों में गाड़ी नहीं पहुंच पाती। कपड़े लगाकर पानी को फिल्टर किया जाता है, और फिर उसे पिया जाता है। बरसात के सीजन में हालात और भी खराब होंगे। इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
बृजेश्वर सिंह इंदू,
बीडीसी चेयरमैन
बरनोटी
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प्राथमिकता के आधार पर पानी की सप्लाई की जा रही है। भूजल स्तर गिरना और कम वोल्टेज सप्लाई प्रभावित होने की बड़ी वजह हैं, लेकिन विभाग लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। अगले एक महीने के भीतर हालात बेहतर होने की उम्मीद है।
-विक्रम डोगरा
कार्यकारी अभियंता
जलशक्ति विभाग, कठुआ