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डेंगू की मरीज ने तोड़ा दम,सरकारी रिकार्ड में मौत नहीं

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कठुआ। जिले में महामारी की तरह फैल रहे डेंगू को लेकर प्रशासन की लापरवाही महंगी साबित होने जा रही है। इस सीजन में डेंगू से गोविंदसर इलाके में ही दूसरी मौत जहां सामने आ चुकी है, वहीं सरकारी आंकड़ों में फिलहाल डेंगू से हुई मौत का आंकड़ा शून्य ही चल रहा है। यही नहीं पिछले पांच दिन से जीएमसी कठुआ में जहां डेंगू जांच की सुविधा ठप पड़ी थी, वहीं निजी लैब की ओर से जांचे गए सैंपल की रिपोर्ट भी स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी डेंगू का डंक बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार को जीएमसी कठुआ में डेंगू जांच की प्रक्रिया शुरू हुई तो पिछले कई दिन से लंबित पड़े सैंपलों की रिपोर्ट में आठ लोगों को डेंगू पॉजिटिव पाया गया है। उधर, जिले के एक निजी अस्पताल की ओर से इसी महीने जांचे गए मरीजों के बाद 11 लोगों के पॉजिटिव पाए जाने की रिपोर्ट अब जाकर स्वास्थ्य विभाग को दी गई है। जिसके बाद बुधवार को जिले में आधिकारिक रूप से सक्रिय डेंगू मरीजों का आंकड़ा 101 पहुंच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ताजा मामलों में तीन गोविंदसर गांव से, एक हीरानगर, एक लखनपुर, एक जंगलोट और एक कठुआ से है।
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प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोविंदसर से एक और डेंगू पॉजिटिव पाई गई महिला की मौत हो गई है। इससे पहले रेलवे कॉलोनी में एक महिला की मौत का मामला डेंगू से सामने आया था। मृतक महिला के परिजन मुकेश कुमार ने बताया कि उनकी सास शीला देवी पत्नी अंचल पॉल, पंजाब के पठानकोट जिले के जाखोलाड़ी से सटे चश्मा गांव से गोविंदसर अपनी बेटी को करवा चौथ के त्यौहार पर मिलने आई थी। रात अधिक होने पर वे गांव में ही रुके और दूसरे दिन उन्हें बुखार की शिकायत के बाद जीएमसी कठुआ में भर्ती करवाया गया। जिसके बाद निजी लैब से जांच में उन्हें डेंगू की पुष्टि हो गई थी। बताया कि इसके बाद उनकी तबियत खराब होती जा रही थी और उन्हें परिजन अमृतसर के अस्पताल में उपचार के लिए ले गए लेकिन मौत हो गई।
सीएमओ कठुआ डॉ अशोक चौधरी ने बताया कि उनके संज्ञान में डेंगू से मौत का फिलहाल कोई भी मामला नहीं है। बताया कि डेंगू के निजी लैब से दिए जा रहे मामलों की जांच भी जीएमसी कठुआ में की जाती है।
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