इस साल मौसम की मार सिर्फ मनुष्यों को ही नहीं पशु पक्षियों को भी प्रभावित कर रही है।
बारिश कम होने और जिला में बर्फबारी कम होने का सीधा असर प्रवासी पक्षियों पर पड़ा है। अमूमन फरवरी माह के अंत तक जिला के विभिन्न वेटलैंड इलाकों को छोड़कर जाने वाले पक्षियों ने अभी से लौटना शुरू कर दिया है।
प्रकृति के इस बदलाव में खुद को असहज महसूस कर रहे पक्षियों ने संभवत: इस बार अपने घरों को लौटना ही मुनासिब समझा है। जिला के उज्ज बैराज सहित रंजीत सागर बांध से सटे वेटलैंड इलाकों में स्थानीय और बाहरी देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों की हर साल तादाद हजारों में रहती है।
मौसम के अनुरूप हर साल यह पक्षी अक्तूबर के महीने में घराना वेटलैंड, मानसर, उज्ज बैराज और रंजीत सागर बांध को चार महीने के लिए अपनी रिहाइश बनाते हैं, लेकिन इस बार मौसम में बदलाव ने इन्हें भी खासा प्रभावित किया है। वन्य जीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोरमोरेंट जिसे स्थानीय भाषा में टटीरी कहा जाता है, इन इलाकों में माइग्रेट करती हैं।
इसके अतिरिक्त साइबेरियन हंस, कील सहित ग्रे हेरॉन और लिटिल ग्रीब प्रजाति के पक्षी न्यूजीलैंड, अमेरिका और आस्ट्रेलिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर जम्मू कश्मीर के विभिन्न वेटलैंड में पहुंचते हैं।
कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए यह पक्षी अपने इलाके के अनुरूप मौसम की तलाश में पहुंचते हैं, लेकिन, इस बार यहां का मौसम भी इन्हें रास नहीं आया है, जिसकी वजह से इन्होंने जल्दी लौटना शुरू कर दिया है।