जम्मू/कठुआ। सोमवार को पशु तस्करी का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया, लेकिन यह पहली बार नहीं है। पिछले कुछ दशक में पशु तस्करों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो गया है, जो लखनपुर से लेकर कश्मीर संभाग के विभिन्न इलाकों तक तस्करी कर लाए पशुओं को पहुंचाने का काम करता है। इन मवेशियों के मांस की भारी मांग होने से इसकी तस्करी की जाती है।
जानकारों की मानें तो कई पुलिस पोस्टों पर कब नाके लगते हैं और कब हटाए जाते हैं, तस्करों को इसकी भली-भांति जानकारी होती है। जम्मू-कश्मीर में दाखिल होने के लिए पशु तस्कर कई बार दरिया के कच्चे रूट का सहारा लेते हैं, तो कई बार हाईवे से सीधे दाखिल होते रहे हैं। जम्मू कश्मीर में दाखिल होने के लिए दरिया से कई रूट हैं, जिस पर चौबीस घंटे पहरा दे पाना मुनासिब नहीं है। इसी बात का फायदा तस्कर उठाते हैं। लखनपुर पुलिस को किसी तरह से गच्चा देने के बाद तस्कर कई रूट इस्तेमाल करते हैं। इसमें दियालाचक छलां मार्ग से होते हुए उधमपुर पहुंचना हो या फिर सांबा जिला के मानसर से होते हुए उधमपुर पहुंचना हो या फिर जम्मू से होते हुए झज्जर कोटली नाके को पार करते हुए जाने के रूट शामिल हैं। कठुआ जिला के बनी-भद्रवाह मार्ग को भी तस्कर इस्तेमाल करते रहे हैं। पुलिस के कई थाने और चौकियों को लांघकर तस्करों का कश्मीर संभाग में दाखिल होना कोई अचरज की बात नहीं है, बल्कि पूरा ताना-बाना बुनकर ऐसा किया जाता है।
जानकारों की मानें तो तस्कर पुलिस नाकों से बचने के लिए कई बार पैदल ही मवेशियों को कई गांव पार करवाते हैं और फिर वाहन में लादकर कश्मीर की ओर ले जाते हैं। सूत्रों की मानें तो पुलिस की इन तस्करी रूट पर पड़ने वाली पोस्टों या थानों पर उन्हें अधिकारियों को डयूटी मिलती है जो इस नेटवर्क को जिंदा रखते हैं। छेड़छाड़ करने वालों को बदली कर दिया जाता है। पशु तस्करी के लिए रोजाना रात लाखों की डील होती है और दबाव पड़ने पर इक्का दुक्का वाहन को पकड़वाकर अन्य वाहनों को सेफ रूट दिखा दिया जाता है। ऐसे में लोग भी निश्चिंत हो जाते हैं कि पशु तस्करी का प्रयास विफल किया जा रहा है। लचर कानून की वजह से पशु तस्करी में संलिप्त वाहन भी छूट जाते हैं और सौ में से एक मामले में पकड़े जाने वाले तस्कर भी आसानी से रिहा हो जाते हैं।