फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kathua News: पशुओं का स्वामित्व नहीं कर सके साबित, कोर्ट ने खारिज की याचिका

Sun, 04 Jan 2026 12:18 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
विज्ञापन
विज्ञापन
अदालत से
विज्ञापन

इन मवेशियों को हाल ही में राजबाग पुलिस ने किया था जब्त
न्यायाधीश ने ओडिशा उच्च न्यायालय के ध्यान फाउंडेशन बनाम राज्य ओडिशा मामले का दिया हवाला
संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। मुंसिफ कोर्ट कठुआ ने वाहन में लदे 10 मवेशियों का स्वामित्व साबित नहीं कर पाने पर व्यक्ति की रिहाई याचिका को खारिज कर दिया है। बता दें कि इन मवेशियों को हाल ही में राजबाग पुलिस ने जब्त किया था।
आदेश के अनुसार कोर्ट ने माना कि मवेशियों के परिवहन करने के नियमों की स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। पशु परिवहन नियम 1978 के अनुसार एक वाहन में अधिकतम छह पशु ही ले जा सकते है, जबकि जब्त किए गए वाहन में पशु की संख्या 10 थी जिन्हें अमानवीय तरीके से ठूंसा गया था। इसके अलावा अदालत ने पशुओं के परिवहन करने के प्रमाणपत्र को नकली बताया है। अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में प्रस्तुत पशुओं पर लगे टैग एनडीएमएल पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं और प्रमाणपत्र सत्यापित नहीं हो सका है। जिसके चलते पशुओं का स्वामित्व साबित नहीं हो पाया है। जिसके बाद अदालत ने जब्त मवेशियों की रिहाई की याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया है।
विज्ञापन



कोर्ट में दायर आवेदन के अनुसार आरोपी मौलवी गुलाम मोहीउदिन कसाना निवासी कंगन श्रीनगर पर आरोप है कि वह बीते दिसंबर महीने में 10 मवेशियों को अमानवीय तरीके परिवहन कर रहा था। इन मवेशियों को वाहन पंजीकृत जेके08ई-5524 में लदे हुए थे। वाहन को राजबाग पुलिस ने जब्त कर इन मवेशियों को कीड़िया गंडयाल गोशाला में सुपुर्दनामा पर रखे गए हैं। बीते 23 फरवरी 2025 को आरोपी ने कोर्ट में आवेदन देकर दावा किया कि जब्त किए गए पशु उसके स्वामित्व में हैं और पुलिस ने झूठे मामले में उन्हें पकड़ लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील साहिल शर्मा ने कोर्ट में पुलिस की रिपोर्ट को प्रस्तुत कर कहा कि इन पशुओं को बिना जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिक्री के लिए ले जाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इन मवेशियों को वाहन में रस्सियों से बांधकर ठूंसा गया था और उनके पानी और चारा की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आवेदक ने पशुओं का स्वामित्व साबित करने के लिए कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है और यदि पशु उसे लौटा दिए जाते हैं तो पुनः क्रूरता से परिवहन की आशंका रहेगी और इससे जनभावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। लिहाजा उनके आवेदन को खारिज करने की अपील की गई। दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद न्यायालय ने 3 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि सीडी फाइल में उपलब्ध तस्वीरों का उल्लेख करते हुए कहा कि पशुओं को अमानवीय तरीके से बांधा गया था।
विज्ञापन

न्यायाधीश ने ओडिशा उच्च न्यायालय ने ध्यान फाउंडेशन बनाम राज्य ओडिशा मामले का हवाला देते हुए कहा कि क्रूरता के आरोपों में जब्त पशुओं की अंतरिम अभिरक्षा मालिक को नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने कहा कि पशुओं को लौटाने से उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और मामले की जांच प्रभावित हो सकती है। इसके बाद अदालत ने दायर याचिका को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें