जिले में भैया दूज का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। भाईयों के माथे बहनों से टीका करने के बाद सजे दिखाई दिए। बहनों के भाईयों के यहां पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
माथे पर टीका लगाते हुए बहनों ने भाईयों की सलामती की दुआ मांगी। सुबह से ही दुकानों पर खरीदारी करने के लिए महिलाओं और युवतियों का तांता लगा रहा।
मिठाइयों से लेकर आकर्षक तोहफों की जमकर खरीदारी की गई। भाई बहन के प्रेम को सूत्र में पिरोते इस त्योहार को जितना उत्साह बहनों में दिखा उतने ही भाई भी उत्साहित दिखे। भाईयों ने भी बहनों को स्नेह स्वरूप उपहार दिए।
धनतेरस, छोटी दिवाली, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भैया दूज के साथ ही दीपावली पर्व जिले में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया।
भाई दूज के रूप में मनाए जाने वाले त्योहार को लेकर ऐसा माना जाता है कि दिवाली के बाद भाई दूज के दिन ही यमराज ने अपनी बहन यमी के घर का रुख किया था जहां पर यमराज की बहन यमी ने उनके माथे पर तिलक लगाकर उनकी सलामती के लिए दुआ मांगी थी।
मान्यता है कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन से माथे पर तिलक लगवाता है वह कभी भी नर्क में नहीं जाता। वहीं, एक अन्य दंत कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने नारकासुर का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर का रुख किया था।
वहां पर श्री कृष्ण की बहन सुभद्रा ने दिए जलाकर भाई का स्वागत किया था और तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की दुआ मांगी थी। वर्तमान में भी यह प्रथा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली का पर्व इस त्यौहार के बिना अधूरा है।