नेशनल हाईवे पर सुपर फास्ट बसें मौत की सवारी बन रही हैं। हाईवे पर सौ किलोमीटर तक की रफ्तार से दौड़ती ये बसें सवारियों की सांसें थाम देती हैं। पिछले कुछ समय से हाईवे पर बढ़ते हादसे इस बात की ही गवाही दे रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जम्मू-कठुआ रूट पर निजी बसों की संख्या तीन सौ से कुछ अधिक है। इसमें कुछ टू बाई टू हैं और कुछ थ्री बाई टू हैं। कठुआ से जम्मू के बीच की दूरी 82 किलोमीटर है। सुपर फास्ट बसों के लिए यह समय पौने दो घंटों का है।
अब एक नई बस सेवा राजधानी नाम से चलाई गई है। इसका समय सवा घंटा तय किया गया है। इसके बाद प्रत्येक बस के बीच का अंतर चार से पांच मिनट का ही है। एक बस जाने के बाद दूसरी बस पांच मिनट केे बाद बस अड्डे से निकल जाती है। कुछ आगे चलकर सवारियों के चक्कर में दोनों बसों में आगे निकलने की होड़ लगती है।
ऐसे में स्पीड मानकों से काफी अधिक हो जाती है। इसके साथ ही एक स्टाप पर रुकने का समय भी दो मिनट से अधिक नहीं है, लेकिन अकसर बसें पांच मिनट तक रुकती हैं। यह समय कवर करने के लिए चालक और तेज से बस दौड़ाते हैं। दरअसल, देरी से पहुंचने पर बस चालकों को पेनाल्टी भरनी पड़ती है।
नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया ने इस नेशनल हाईवे पर अस्सी किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइनिंग स्पीड तय की है। ट्रैफिक पुलिस भी इसी स्पीड को निर्धारित कर चुकी है।, लेकिन बसों की रफ्तार इससे कहीं अधिक होती है। कभी समय कम होने के चलते तो कभी दूसरी बस के साथ रेस के चक्कर में रफ्तार मानक से अधिक अधिक हो जाती है।
बसों की ओवर स्पीड को रोकने के लिए वर्तमान में यातायात विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रैफिक विभाग की इंटरसेप्टर गाड़ी द्वारा कभी-कभार मदद ली जाती है। चौक-चौराहों के पास स्पीड ब्रेकर भी लगाए गए हैं। उच्च अधिकारियों से बात की गई है।
-अमरजीत सिंह, आरटीओ कठुआ