माता का सुकराला गांव में मंदिर निर्माण होने की कथा भी काफी रोचक है। कहते हैं कि एक बार चंबा का राजा उमेध सिंह अपने संबंधी बिलावर के राजा के पास आया हुआ था। एक दिन वह शिकार खेलने के लिए सुकराला के वन में गया, यहां उसने 140 पीजड़ों यानी कि जंगली बकरियों का शिकार किया।
उसके इस कृत्य से मात मल्ल को बड़ा क्र ोध आया। माता की माया से राजा उमेध सिंह के पेट में जोर की पीड़ा शुरू हो गई। इलाज के लिए बड़े-बड़े वैद्यों और हकीमों को बुलाया गया, मगर राजा का मर्ज ठीक नहीं हुआ।
अंत में माता के चेले जुनान के बुलाया गया। उसने बताया कि यह सब माता के प्रकोप का ही फल है। क्योंकि राजा ने माता के वन में जाकर वन प्राणियों की निर्मम हत्या की है। राजा ने माता से क्षमा मांगी और वचन दिया कि माता जो दंड मूझे देगी, वह मैं भुगतूंगा। माता राजा के वचनों से प्रसन्न हो गई और कहा कि यदि तू अपने परिवार सहित आकर सुकराला गांव में मेरा भवन बनाएगा तो मैं तुम्हें क्षमा कर दूंगी।
राजा ने माता को जैसे ही भवन बनाने का वचन दिया, वह बिल्कुल ठीक हो गया। बाद में उसने चंबा से सारी भवन सामग्री मंगवा कर माता के भवन का निर्माण करवाया। यहां आज हर साल हजारों की संख्या में माता के भगत माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं।