पारा चढ़ने के साथ ही कठुआ और आसपास के क्षेत्रों में रेबीज के मामलों में भी भारी उछाल सामने आया है। जिला अस्पताल कठुआ से प्राप्त जानकारी के अनुसार औसतन आठ से दस मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। अप्रैल महीने में ही रेबीज के अब तक 190 मामले रिकार्ड किए जा चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहां लगातार मामलों में भारी इजाफा हुआ है, वहीं जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन भी पिछले पंद्रह दिन से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी दुकानों से अपने स्तर पर रेबीज की वैक्सीन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। मामला इसलिए भी गंभीर है चूंकि रेबीज के मामलों में लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है। लेकिन शायद स्वास्थ्य निदेशालय को इसकी परवाह नहीं है।
एक तो लोग निजी स्तर पर 400 रुपए का एक इंजेक्शन बाजार से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल के स्टोर से जानकारी लेने पर पता चला कि दवा खरीदने के लिए विभागीय अधिकारियों को एक नहीं तीन बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन जिला अस्पताल की कारपोरेशन पर पहले से देनदारी के चलते कारपोरेशन भी उधार में दवा उपलब्ध करवाने से साफ मना कर रही है।
आखिर कैसे आएगी दवा
अब एंटी रेबीज दवा भेजने के लिए जम्मू कश्मीर मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने जहां राशि जारी करने की बात कही है वहीं इस समय जिला अस्पताल में कोई आधिकारिक तौर पर डीडीओ नहीं है। जिला अस्पताल के अधीक्षक भी छुट्टी पर हैं। जिन्हें उनके स्थान पर चार्ज दिया गया था, उन्हाेंने भी जिला अस्पताल में विधायक के दौरे के बाद सामने आए अव्यवस्था के आलम के चलते हाथ खड़े करते हुए छुट्टी ले ली।