बार्डर यूनियन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर गांव करोल में भूख हड़ताल जारी कर दी है। पहले दिन रतन चंद व तरयेम सिंह भूख हड़ताल पर बैठे। उन्होंने बताया कि सरकार ने बार्डर निवासियों की जो जमीन बंकरों व सुरक्षा संबंधी कारणों के तहत इस्तेमाल करने के लिए ली थी, उसके लिए मुआवजा देने का वादा किया था। लेकिन आज तक किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसके लिए वह कई बार उच्च अधिकारियों से मिल चुके हैं, पर फिर भी उन्हें मुआवजा जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि किसानों की जितनी भी जमीन तारबंदी के आगे है, उसे रक्षा मंत्रालय अपने अधीन ले और किसानों को उस जमीन की कीमत दे। उन्होंने कहा कि कई बार फसल की बुआई कर देते हैं पर उन्हें भरोसा नहीं होता कि वो फसल काट पाएंगे या नहीं। पाकिस्तान कभी भी सीजफायर का उल्लंघन कर गोलाबारी शुरू कर देता है। बीएसएफ किसानों को तारबंदी के आगे जाने नहीं देती। अगर जाने देती है तो किसान पार जाने से डरते हैं।
उन्होंने बताया कि सफाई के नाम पर बीएसएफ ने तारबंदी के बाद उनकी निजी जमीन से पेड़ों की कटाई की है। उन पेड़ों का भी जल्द से जल्द मुआवजा जारी किया जाए। इस दौरान बार्डर यूनियन के प्रधान नानक चंद, उप प्रधान व सरपंच भारत भूषण, अजीत कुमार, थुरुराम, तरसेम लाल, बंसीलाल आदि मौजूद रहे।