लखनपुर में पशुधन मेले का समापन, पहले दिन 68 और दूसरे दिन बेचे गए 90 मवेशी
संवाद न्यूज एजेंसी
लखनपुर। लखनपुर में शनिवार को पशुधन मेले का समापन हो गया, जिसमें पशुपालन विभाग की निदेशक डॉ. शुभ्रा शर्मा व शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंस व टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर बी एन त्रिपाठी विशेष रूप से मौजूद रहे।
पशुपालन विभाग कठुआ की ओर से आयोजित दो दिवसीय पशुधन मेले में दो दिन में कुल 158 मवेशियों की बिक्री हुई। इसमें पहले दिन 68 मवेशियों की बिक्री हुई और दूसरे दिन 90 मवेशी बेचे गए। जानकारी के अनुसार मेले के पहले दिन भारत बंद के चलते गाड़ियों की आवाजाही बंद रही, जिस कारण मवेशियों की बिक्री कम हुई और दूसरे दिन मवेशियों की बिक्री अच्छी रही। इसमें किसान व पशुपालकों ने एचएफ, जर्सी की बिक्री ज्यादा रही। वहीं विभाग के कठुआ प्रमुख ने बताया कि विभाग की तरफ से ऐसे मेलों का आयोजन करवाया जाता रहेगा जिसमें किसान व पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जाएगा।
आवारा मवेशी किसानों के लिए बने परेशानी का सबब
महानपुर। उपमंडल महानपुर के सटे इलाके करणबरा हाथीपुर, मारा पट्टी, प्लानु, चनेरा, धमलाड और अन्य गांवों में आवारा मवेशी किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। खेतों में लगाई गई कई प्रकार की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को रात के समय में भी रखवाली करनी पड़ती है। किसान पवन कुमार, भूषण सिंह व यशपाल शर्मा ने बताया कि इन दोनों कस्बे और गांवों में आवारा मवेशियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में किसानों ने गेहूं की फसल लगाई है, जिससे इलाके में घूमने वाले आवारा मवेशी काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों ने कहा कि पहले ही गेहूं की फसल प्रकृति की मार झेल रही है। अभी बारिश होने से किसानों को थोड़ी उम्मीद है। किसानों ने बताया कि जो थोड़ी बहुत फसल खेतों में है उसे आवारा मवेशी बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं और इनसे फसलों को बचाना मुश्किल हो गया है। लोगों ने कहा कि आवारा मवेशियों को रखने के लिए बनाई गई गोशालाओं से भी यह समस्या हल नहीं हुई। किसानों ने कहा कि फसलों को बचाने के लिए इन दिनों आवारा मवेशियों की 24 घंटे रखवाली करनी पड़ रही है। अगर कुछ देर रखवाली न करे तो मवेशी खेतों में पहुंचकर फसल को बर्बाद कर देते हैं। आए दिन सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों के कारण हादसे भी हुए हैं। कई बार मवेशियों को पकड़कर दूरदराज के जंगल में छोड़कर आते हैं, लेकिन कुछ समय बाद चारे की तलाश में गावों की तरफ रुख कर जाते हैं। इनकी वजह से इलाके के किसानों को परेशानियां का सामना करना पड़ रहा है।