सुरक्षा की गारंटी ना मिलने के बाद वापस लौटते किसान। संवाद
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हीरानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर तारबंदी के आगे 19 साल बाद खेती के लिए आए किसान सुरक्षा की गारंटी न मिलने पर बैरंग लौट गए। इससे पूर्व किसानों ने तारबंदी के पार 2002 में खेती की थी। ट्रैक्टर पर खाद और बीज साथ लेकर आए किसान बीएसएफ से सुरक्षा की गारंटी मांग रहे थे। तारबंदी के पार जाने की शर्तों से गुस्साए किसान बिना खेती के ही लौट आए। सोमवार को हीरानगर के छन्न टांडा और चक चंगा के किसान कृषि विभाग की टीम के साथ चांदमा पोस्ट के नजदीक तारबंदी पार नहीं गए।
किसानों ने कहा कि अगर तारबंदी के आगे खेती के लिए सुरक्षा उपलब्ध होने तक वह खेती नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन यहां खेती के लिए पहले हर सहायता के आश्वासन दे रहा था, लेकिन जब किसान यहां खेती के लिए तैयार हुए तो सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिल रही है। किसान सुंदरलाल ने कहा कि खेती के लिए ट्रैक्टर और गेहूं का बीज लेकर गए थे। बीएसएफ के गेट पर पहुंचे तो अधिकारियों ने सुरक्षा की गारंटी देने के बजाय कई तरह की शर्तें रखना शुरू कर दीं। किसानों को खेती के लिए किसी और को साथ ले जाने से भी मना कर दिया।
किसानों ने कहा कि जिला उपाध्यक्ष और कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में बैठक के दौरान बीएसएफ अधिकारियों ने सुरक्षा देने का आश्वासन दिया था। गणेश शर्मा ने कहा कि तारबंदी के आगे खेती करने को तैयार हैं लेकिन यहां किसानों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिल रही है। किसानों पर नाहक पाबंदियां नहीं लगाई जा सकतीं। गौरतलब है कि प्रशासन की ओर से तारबंदी के आगे खेती के लिए सीमावर्ती किसानों को प्रेरित करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से कई बैठकें की गईं। जिला उपायुक्त और कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को आश्वासन दिया था कि यहां खेती करने पर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता पर दिया जाएगा। इन्हीं बैठकों के दौरान बीएसएफ के अधिकारियों ने भी किसानों को सुरक्षा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।
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आज हमारी टीम किसानों के साथ तारबंदी के आगे गेहूं का बीज बोने का काम शुरू कराने के लिए गई। बीज, खाद के अलावा ट्रैक्टर भी पाबंदी के पास पहुंचाए गए। लेकिन वहां किसानों और देशों के अधिकारियों के बीच सुरक्षा को लेकर बात हुई जिस पर किसानों को सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली और वह लौट आए।
-मुरारी ढींगरा, नोडल अफसर