उप मंडल के कंडी इलाके में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई से किसानों की नींद उड़ गई है। उपमंडल में पिछले 10 दिनों में करीब 50 पेड़ चोरी हो गए। इस घटना ने वन विभाग और पुलिस विभाग पर सवाल खड़े कर दिए है। हालांकि जानकारी के बाद वीरवार को तहसीलदार ने मौके का जायजा लिया और मामले की रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी।
स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में लकड़ी माफियाओं का गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह जिन इलाकों में पेड़ों की कटाई की परमीशन मिली है, वहां चोरी-छिपे सरकारी जमीन पर लगे खैर के पेड़ों की नंबरिंग कर दे रहा है। इसके बाद रात में किसी समय पेड़ों को काटकर उठा ले जाया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि यह कार्य विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं।
मंगलवार रात को उपमंडल के पंचायत कूटा के पट्टा इलाके से खैर तस्कर करीब डेढ़ दर्जन पेड़ रातोरात चुरा ले गए। इसके बाद स्थानीय निवासी नरेश कुमार और देवराज ने हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी इसी इलाके में खैर के पेड़ चोरी हो गए। करीब 10 दिनों में इस तरह की 5 से 6 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें करीब 50 पेड़ काटकर उठा ले जाया गया, लेकिन पुलिस और वन विभाग मामले से अनजान बना रहा।
जानकारी के अनुसार डिंगा अंब तहसील में पड़ते गांव नोनी में खैर की कटाई की अनुमति मिलने के बाद तस्करों ने सरकारी जमीनों पर खैर के पेड़ों पर भी नंबर लगा दिए हैं, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। जबकि उन्हें इसकी अनुमति नहीं है। हालांकि मामले की जानकारी के बाद तहसीलदार ने मौके का जायजा लिया और मामले की रिपोर्ट एसडीएम को सौंप दी।उनका कहना है की जिन्होंने भी यह किया है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी जमीनों पर खैर के पेड़ों की मार्किंग विभाग की तरफ से नहीं हुई है। जैसे ही यह मामला संज्ञान में आया मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया गया। पेड़ों पर जो मार्किंग हुई है उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह मार्किंग किसी अन्य ने की है। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम को भेजी गई है। अमित उपाध्याय, तहसीलदार डिंगा अंब