कठुआ। तेज धूप, गर्म सड़क और उसपर चलते सीपी वर्कर्स। यह नजारा बुधवार को शहर की सड़कों पर उस समय देखने को मिला जब मजदूर दिवस के मौके पर पिछले सात माह से धरना कर रहे पीएचई सीपी वर्कर्स ने साठ माह का बकाया वेतन मांगा। आलम यह कि नंगे पांव और अर्द्घनग्न होकर वर्कर्स ने हक मांगा, लेकिन वेतन के नाम पर फिर उन्हें आश्वासन थमा दिया गया। इतने पर भी जब बात नहीं बनी तो पीएचई सीपी वर्कर्स ने तीन कर्मचारियों को उनके कमरे में बंद कर दिया, जिन्हें बाद में पुलिस ने आकर बाहर निकाला। इसपर भी बात नहीं बनी और केवल एक महीने का वेतन देने का वादा किया गया और बाकि के लिए पत्र अधिकारी को लिखे जाने की बात स्थानीय अधिकारियों ने की। इतना सब होने के बाद सीपी वर्कर्स ने साफ किया वह एक महीने का वेतन लेने के बाद धरने से नहीं उठने वाले हैं। कम से कम छह महीने का वेतन जारी किया जाएगा तो वह धरने से उठने पर विचार कर सकते हैं।
बुधवार को सीपी वर्कर्स ने कड़कती धूप में अर्द्घनग्न होकर और नंगे पांव पीएचई कार्यालय से शहर की सड़कों पर रोष रैली निकाली। लेकिन कार्यालय से शहीदी चौक और फिर जराई चौक से मुखर्जी चौक पहुंचते पहुंचते तीन वर्कर्स की हालत खराब हो गई। पांव में छाले पड़ गए और पांव से खून तक निकल आया। इनमें से एक एक बेहोश तक हो गया। सीपी वर्कर्स ने कहा कि वह क्या करें अधिकारी आश्वासन पर आश्वासन दे रहे हैं। 23 मार्च से उनका एक महीने का वेतन आया है लेकिन अप्रैल भी गुजर गया। उन्होंने कहा कि साठ महीने के वेतन के बजाए एक महीने का वेतन आया है, लेकिन उसे भी जारी करने में अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं। घायल पूर्ण चंद, धर्मपाल और पुष्प ने कहा कि उन्हें कोई शोक नहीं है कि वह नंगे पांव इतनी धूप में सड़क पर चलें। उन्हें इसके काम के लिए मजबूर किया जा रहा है।
कर्मचारियों को किया बंद
रैली के दौरान घायल वर्कर्स का उपचार करवाया गया और उन्हें वापस धरना स्थल पर पहुंचाया गया, जहां पर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। दो के भीतर एक महीने का वेतन देने के आश्वासन को पूरा होते न देख उन्होंने तीन कर्मचारियों को कमरे में बंद कर दिया और बाहर से ताला लगा दिया। करीब पंद्रह मिनट के बाद सिटी थाना से पुलिस बल कार्यालय पहुंचा और ताला खुलवाया। इस दौरान कर्मचारियों और पुलिस अधिकारी के बीच बहस भी हुई, जिसके बाद सिविल विंग के कार्यकारी अभियंता भी मौके पर पहुंचे।
एक घंटे की माथा पच्ची के बाद भी नहीं बनी बात
कर्मचारियों को बंद करने के बाद मौके पर आए अधिकारी ने पुलिस अधिकारियों ने बंद किए गए कर्मचारियों और सीपी वर्कर्स के साथ करीब एक घंटे तक एक महीने का वेतन लेने और छह महीने के वेतन के लिए उच्च अधिकारी को पत्र लिखने व उनसे मिलने के एवज में धरना वापस लेने के लिए माथा पच्ची की। एक बार धरना स्थल पर तो एक बार कार्यालय में चर्चा के बाद भी कोई परिणाम सामने नहीं आया। कार्यकारी अभियंता ने कहा कि वह दो दिन के भीतर पैसा जारी करवा देंगे। इसके साथ ही छह माह के वेतन के लिए करीब दो करोड़ रुपये जारी करने के लिए पत्र भी लिख देंगे, जिसकी एक कापी सीपी वर्कर्स को दी जाएगी। वह धरना वापिस लें, लेकिन सीपी वर्कर्स ने कहा कि जब तक उन्हें छह महीने का वेतन नहीं मिलता वह धरना वापस करने पर विचार तक नहीं करेंगे। करीब एक घंटे तक हुई माथा पच्ची के बाद भी बात नहीं बनी और सीपी वर्कर्स ने अपना धरना जारी रखने का ऐलान किया।
सीपी वर्कर्स की मांगें
-साठ महीने का बकाया वेतन जारी किया जाए
- एसआरओ 520 के तहत कर्मचारियों को पक्का किया जाए
विभाग का तर्क
सीपी वर्कर्स की मांगों के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया है। एक महीने का वेतन दो दिन के भीतर जारी किया जाएगा। छह महीने के वेतन के लिए पत्र लिख दिया गया है। कार्यकारी अभियंता और सीपी वर्कर्स की एक टीम मुख्य अभियंता से मांगों पर चर्चा करने के लिए जाएगी।