कठुआ। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनी-भद्रवाह सड़क मार्ग को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना एक चुनौती बना हुआ है। बनी से भद्रवाह सड़क विस्तारीकरण कार्य पहले ही मार्च 2017 की समय सीमा को पार कर चुका है, जबकि वर्ष 2019 तक अब इसे पूरा किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। उस पर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा एनओसी जारी करने में हो रही देरी इस परियोजना पर ग्रहण लगा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह से हो रही देरी के चलते इस मार्ग के आने वाले पांच सालों तक भी पूरा होने की उम्मीद नहीं है। ऐसा तब है जब केंद्र सरकार पहले ही इसे नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक मंजूरी देकर डीपीआर तैयार करवाने में जुटी है, हालांकि नेशनल हाईवे का काम पूरा होने में डेढ़ दशक और लगना स्वाभाविक है। इस मार्ग को साल भर सक्रिय रखने के लिए छत्रगलां टनल भी मंजूर की गई है।
बीआरओ सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भद्रवाह की ओर से छत्रगलां टॉप तक तेजी से काम किया जा रहा है, जबकि बनी की ओर से मात्र 25 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। साल दर साल विभिन्न विभागों से मिलने वाली एनओसी में होती देरी के चलते काम की गति पर भी असर पड़ता जा रहा है। इस वर्ष कम बर्फबारी के चलते बीआरओ ने मार्च माह की शुरुआत में ही सड़क विस्तारीकरण कार्य को शुरू कर दिया जो जनवरी माह में बर्फबारी के चलते ठप हुआ था। विकट परिस्थितियों में बन रही इस सड़क को लेकर ठेकेदारों द्वारा रुचि न दिखाए जाने से अब बीआरओ ने खुद ही काम तेजी से करवाने की जिम्मेदारी ली है। सितंबर 2017 में बाकायदा तारकोल बिछाने के लिए हॉट मिक्स प्लांट और 20 टीपीएच क्षमता के स्टोन क्रशर को स्थापित करने की योजना के साथ बीआरओ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य विभागों को भी एनओसी के लिए लिखा था, लेकिन बार-बार लिखने के बाद भी अब तक एनओसी जारी नहीं की गई है। इससे काम में देरी हो रही है।