जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका को खारिज कर इसे दायर करने वाले वकील पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगा दी। यह राशि रजिस्ट्रार के पास जमा करानी होगी, जिसे याचिकाकर्ताओं की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने पाया कि याचिका में जम्मू-कश्मीर के मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और जवाबदेही आयोग को फिर से खोलने की मांग की गई है, लेकिन इसमें दी गई दलीलें दर्शाती हैं कि याची ने कोर्ट को कानूनी नहीं बल्कि सियासी मंच की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की है।
इसके लिए याची पर 10 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई जाती है। हालांकि कोर्ट ने सरकार से उम्मीद जताई कि तीनों आयोगों को सक्रिय रूप से स्थापित करने को लेकर सरकार काम करेगी। याची निखिल पाधा ने अपने आप को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताया और अनुच्छेद 370 हटने के बाद निरस्त हुए तीनों आयोगों को बहाल करने की मांग की। याचिका में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार आयोग के पास कुल 765 मामले लंबित थे, जिनमें से 267 मामले सेना, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के खिलाफ हैं।
एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने याची की दलीलों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि हाल ही में कानून का स्नातक व्यक्ति बिना आधार बताए खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता कैसे कह सकता है। इसके अलावा जिस तरह से मामले को प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है, वह साफ करता है कि याचिका के पीछे मंशा आयोगों को खोलने की नहीं, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ हैं। कोर्ट ने पाया कि याची ने सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन, कई सख्त कानून लागू करने से लेकर जिला विकास परिषद चुनाव में गुपकार गठबंधन की जीत का तर्क दिया है।
यह दर्शाता है कि मंशा सरकार पर हमला है, जिसमें राजनीतिक लाभ लेने की मंशा झलकती है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सांविधानिक संस्था या सरकारी विभाग के खिलाफ सीधे अदालत में आने से पहले संबंधित मंच पर मामला उठाया जाना चाहिए। जनहित याचिका के सरोकार जनहित से होते हैं, लेकिन संदेहास्पद याची के माध्यम से दायर होने वाली याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जेएनएफ
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महंत बचित्तर सिंह कॉलेज की चल संपत्ति अटैच होगी
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) जम्मू ने एक याची को अवार्ड की गई राशि का भुगतान न करने पर महंत बचित्तर सिंह कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेकभनौलॉजी बब्लियाना जीवन नगर रोड जम्मू की चल संपत्ति अटैच करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट आदेश के अनुसार कॉलेज के प्रधानाचार्य के माध्यम से 65,720 रुपये की राशि अटैच कर कोर्ट में जमा करवानी होगी। यह राशि याची को दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि जिला उपायुक्त जम्मू अगली तारीख तक आदेश पर अमल सुनिश्चित करें।