हाईकोर्ट ने एक महीने की बच्ची को उसकी मां से मिलाने के लिए पुलिस टीम की सराहना की है। मां द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा किया गया है। इसमें बच्चे को बरामद कर उसे मां के हवाले करने के आदेश थे। न्यायमूर्ति अली मोहम्मद माग्रे की पीठ ने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी की टीम द्वारा किए गए काम की सराहना की।
पुलिस ने रविवार को बच्ची को बरामद किया था, जिसे उसके ससुराल वालों ने उसकी मां से जबरन अलग कर दिया था। उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त को पुलिस को उस समय 24 दिन की बच्ची की मां से फिर से मिलन सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
अदालत ने 3 सितंबर को पुलिस से जांच में तेजी लाने और बच्चे की बरामदगी सुनिश्चित करने को कहा था। बच्ची की मां की याचिका के बाद अदालत ने कहा था कि वह मूकदर्शक बनकर काम नहीं कर सकती और न्याय के हित में बच्चे के जीवन और स्वास्थ्य को बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। अदालत ने श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को बच्ची की बरामदगी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
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तलाशी लेने वाली पुलिस टीम को किसी भी घटना से निपटने के लिए या किसी कानूनी औपचारिकता को पूरा करने के लिए एक मजिस्ट्रेट को साथ रखने रखने का आदेश दिया गया था।टीम को बच्चों के अस्पताल सोनावर श्रीनगर या किसी अन्य अस्पताल से एक बाल रोग विशेषज्ञ को साथ रखने को भी कहा था।