जम्मू कश्मीर विधानसभा ने पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के खिलाफ जांच का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। जनरल सिंह के विवादास्पद बयान पर तीखी बहस के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सभी दलों से ऐसे मुद्दे पर सर्वसम्मति की अपील की।
बाद में अध्यक्ष मुबारक गुल ने सदन की सहमति से प्रस्ताव पारित होने की घोषणा की। सत्ताधारी नेकां, कांग्रेस सहित प्रमुख विपक्षी दल पीडीपी, बीजेपी और पैंथर्स पार्टी के सभी सदस्यों ने एकमत होकर जनरल के आरोपों की जांच कराने के प्रस्ताव पर सहमति जताई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सदन से गुजारिश की कि ऐसे गंभीर आरोपों पर सभी को एकजुट होकर साथ आना चाहिए। सभी सदस्यों ने को पारित मेजें थपथपा कर इसका स्वागत किया।
उमर ने कहा कि उन्होंने इस बाबत पहले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है। कृषि मंत्री गुलाम हसन मीर द्वारा सरकार गिराने के लिए 1.19 करोड़ रुपये लिए जाने के आरोप के बारे में उमर ने कहा कि उन्होंने मंत्री के विवेक पर ही इस मुद्दे को छोड़ दिया है। वैसे इतनी राशि में म्यूनिसपल कारपोरेशन को भी नहीं गिराया जा सकता।
सीएम के प्रस्ताव पर सदन ने एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया है कि सदन सर्वसम्मति से प्रस्ताव करता है कि केंद्र सरकार पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह के आरोपों की जांच समयबद्ध सीमा में पारदर्शी तरीके से कराए।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने सेना की ओर से मंत्रियों को पैसे दिए जाने की बात कहकर रियासत की सियासत में भूचाल ला दिया था। जनरल के आरोपों पर विधानसभा में तीखी बहस हुई।
सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस ने वीके सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया था। सत्तापक्ष और विपक्ष के सभी सदस्यों ने मांग की थी कि वीके सिंह के मुद्दे पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
सोमवार को जनरल के बयान पर जोरदार बहस हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वीके सिंह के आरोपों से लोकतंत्र पर उंगली उठी है। जम्मू-कश्मीर के लोगों के जज्बात से खेला गया है। सभी राजनीतिक पार्टियों की ईमानदारी पर शक किया जाने लगा है।
भारत सरकार को इस पर फैसला लेना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले पर सदन को एकजुटता दिखानी होगी। देश को बताना होगा कि जम्मू-कश्मीर के लोग बिकाऊ नहीं हैं।