गुलमर्ग के पहाड़ों पर अच्छी-खासी बर्फ जमी है। कश्मीर की वादियों में सैलानियों की भीड़ है, लेकिन यहां के कस्बों और गांवों में चुनावी बिसात बिछी है। पहाड़ों पर गिरती बर्फ भी सियासी पारे की तपिश को कम नहीं कर पा रही। बारामुला सीट इस बार पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लड़ने के कारण वैसे ही खास हो गई है। बारामुला के चौराहे पर उमर के पोस्टरों पर उनकी पार्टी के चुनाव चिह्न हल के साथ लिखा है-हल ही हल है। गुलमर्ग से बारामुला के रास्ते पर पीडीपी के कार्यकर्ता अपने चुनाव चिह्न के नारे लगा रहे हैं-पीडीपी है अपनी जमात, याद रखो कलम दवात।
एक और उम्मीदवार और टेरर फंडिंग में तिहाड़ जेल में बंद इंजीनियर रशीद के लिए बेटे अबरार रशीद ने कमान संभाल रखी है। गांव कलंतरा पाइन में काफिला रुकता है और चौराहे पर कश्मीरी में नारे लगने लगते हैं-चून जू, म्यून जू, कैदी नंबर कूनवू। हिंदी में इसका मतलब है कि तेरी जान, मेरी जान, कैदी नंबर 19। कहा जा रहा है कि प्रेशर कुकर पर बटन दबाकर रशीद को तिहाड़ से बाहर निकालने में मदद की जाए। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन की पार्टी का चुनाव चिह्न सेब है। बारामुला सबसे ज्यादा सेब की खेती के लिए जाना जाता है। लोन के समर्थकों का दावा है कि स्थानीय लोगों के सबसे ज्यादा काम वही आएंगे। कांग्रेस यहां उमर अब्दुल्ला के साथ है और भाजपा यहां से भी चुनावी मैदान में नहीं है।