परिसीमन आयोग का जम्मू-कश्मीर दौरा (सांकेतिक तस्वीर)
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डोडा और किश्तवाड़ के क्षेत्रफल ने जम्मू-कश्मीर के परिसीमन में पेच फंसा दिया है। साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट में डोडा का क्षेत्रफल किश्तवाड़ से अधिक दिखाया गया है, जबकि किश्तवाड़ पूरे प्रदेश में सबसे अधिक क्षेत्रफल वाला जिला है। जनसंख्या भी डोडा की किश्तवाड़ से अधिक है। परिसीमन का खाका तैयार करते वक्त जब आयोग ने आंकड़ों का विश्लेषण शुरू किया, तब यह गड़बड़ी पकड़ में आई। अब आयोग इससे उत्पन्न परिणाम तथा उससे निपटने के उपायों को तैयार करने में जुट गया है।
सूत्रों ने बताया कि आयोग परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने में जोरशोर से जुटा है। इस दौरान सभी जिलों के 2011 जनगणना आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। डोडा और किश्तवाड़ के आंकड़ों के विश्लेषण में पता चला कि डोडा का क्षेत्रफल 8912 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 409936 दर्शाई गई है। किश्तवाड़ का क्षेत्रफल 1644 वर्ग किलोमीटर एवं जनसंख्या 230696 दर्ज है। चूंकि परिसीमन का ड्राफ्ट तैयार करने में क्षेत्रफल एवं जनसंख्या ही मुख्य आधार हैं।
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साथ ही विधानसभा सीटों का क्षेत्र जिले की सीमा से बाहर नहीं होना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि आंकड़ों में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद आयोग को अपनी सारी कवायद के गलत हो जाने की आशंका होने लगी। आयोग को यह लगने लगा कि यदि 2011 की जनगणना के प्रारंभिक आंकड़े ही गलत हो गए तो पूरी परिसीमन की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ सकता है। इसके बाद जमीनी हकीकत का पता लगाने की कोशिश की गई। संबंधित जिलों से इसकी तस्दीक की गई।
दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक में मंथन
सूत्रों के अनुसार बुधवार को आयोग की दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें जम्मू-कश्मीर के चुनाव कार्यालय के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। इस बैठक में जनगणना के आंकड़ों को लेकर चर्चा हुई। बैठक में यह कहा गया कि आंकड़ों को जिला प्रशासन से दुरुस्त कराकर दिया जाए ताकि ड्राफ्ट पर काम किया जा सके।
यह भी कहा गया कि यदि मौजूदा आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया तो परिसीमन प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से करने में दिक्कतें सामने आएंगी। इसलिए आंकड़ा बिल्कुल दुरुस्त होना चाहिए ताकि सात सीटें जो बढ़नी है यदि इन दोनों जिलों के खाते में आएं तो उनका सही आकलन हो सके।