बौद्ध धर्मगुरु और चौदहवें दलाईलामा ने कहा कि मानव जीवन बहुमूल्य है। यह समूचे जीवन को सार्थक बनाने का अवसर है। मानव जीवन अच्छे कर्मों का परिणाम है। ऐसे में जीवन को बोधि चित्त के माध्यम से पूरे विश्व में समरसता, शांति और सभी के भले की भावना को जगाने में पर केंद्रित करना चाहिए।
शुक्रवार को लेह के शेवासल टीचिंग ग्राउंड में 50 हजार से अधिक अनुयायियों की उपस्थिति में धर्मगुरु ने ‘बोधि सत्व : जीवन का मार्ग’ विषय पर प्रवचन दिए। धर्मगुरु ने कहा कि जीवन तेजी से खत्म हो रहा है। हमारे आसपास बहुत से गुरु, मित्र, रिश्तेदार, परिवार और लोग हो सकते हैं, लेकिन आखिर में हमें अकेले जाना है।
उस अंतिम घड़ी में हम अपने जीवन का आकलन करते समय संतोष जता सकें। हमें पछताना न पड़ें इसलिए ध्यान लगाएं। बोधि चित्त हमारे मन को शांत करता है। इससे शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और इस तरह से हमारे आसपास का वातावरण भी इसी लय में आने लगता है।
वहीं, प्रवचन स्थल पर सुबह से ही अनुयायियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। बाल लामा से लेकर हर आयु वर्ग से लोग और प्रतिनिधि आयोजन स्थल पर पहुंचे। आयोजकों के अनुसार धर्मगुरु के प्रवचन सुनने के लिए दूसरे दिन 50 हजार से अधिक लोग पहुंचे।
धर्मगुरु के तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए लेह में प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण रूट से यातायात को डायवर्ट कर दिया है। हजारों वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की गई है। बड़े स्तर पर हो रहे आयोजन को 15 से अधिक भाषाओं में वेबकास्ट किया जा रहा है।