बीएसएफ के जवान अब सीमा पार की गतिविधियों पर बुलेट प्रूफ गंडोला से नजर रखेंगे। सीमा पर लगातार घुसपैठ की कोशिशों और हीरानगर व सांबा में हुए फिदायीन हमले के बाद बीएसएफ ने सुरक्षा बंदोबस्त को पुख्ता बनाने के लिए जवानों को आधुनिक उपकरणों से लैस करने के साथ ही इस नई तकनीक को अमल में लाया है।
बुलेट प्रूफ गंडोला से हवा में तैरते हुए जवान रात में थर्मल इमेर्जस, हाई मास्क टावर पर लगी लाइटों से बरसात और धुंध की आड़ में होने वाली घुसपैठ की कोशिशों पर नजर रखेंगे। नदी-नालों से सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों में वृद्धि के बाद बीएसएफ ने यह नया तरीका अपनाया है।
बुलेट प्रूफ गंडोला का पहला प्रयोग बीएसएफ की ओर से बबिया बार्डर पोस्ट पर किया गया है। अफसरों का मानना है कि इससे बीएसएफ के जवान तरना नदी के उस पार झाड़ियों की आड़ में छिपे घुसपैठियों की गोलियों के बीच जाकर उन्हें आसानी से निशाना बना सकेंगे।
बीएसएफ के कमांडेंट जमील ने इस प्रोजेक्ट को तैयार किया है। इस पर मात्र पांच लाख रुपये का खर्चा आया है। हैरानी की बात है कि इतने कम खर्चे में करीब तीन सौ मीटर का गंडोला बिजली के अलावा मैन्युली भी चलेगा।
तरना नदी के दोनों और पक्की चौकी बनाई गई है। तारबंदी के साथ ही इस पर जवान की नजर के अलावा आठ कैमरे भी सीमा के तीनों ओर की मूवमेंट पर नजर रखेंगे। हाई सर्विलांस और हाई रेसोल्यूशन कैमरे से चौकी में बनाए गए अत्याधुनिक सिस्टम से टीवी पर भी मूवमेंट देखी जा सकती है।
बीएसएफ के जम्मू फ्रंटियर के डीआईजी विरेंद्र सिंह के अनुसार मानसून सीजन, कोहरे के दिनों में यह अत्याधुनिक सिस्टम और बुलेट प्रूफ गंडोला से सीमा पर चौकसी और बढ़ेगी। पक्की चौकी भी मल्टी लेयर है। तीन और चार लेयर की इस चौकी के ऊपर विशेष टीन की छत और उस पर मिट्टी डाली गई है। जो शैलिंग प्रूफ है।
फिलहाल बबिया बार्डर पर तरना नदी पर ही यह पहला गंडोला तैयार किया गया है। इससे सीमा पार झाड़ियों या नदी के साथ सरकंड़ों से भी कोई मूवमेंट होगी तो उस पर भी नजर रखी जा सकेगी। सीमा पर आगे ऐसे और गंडोला तैयार किए जाएंगे।
इसे प्रोजेक्ट को बीएसएफ ने स्वयं तैयार किया है और इसमें किसी भी निर्माण एजेंसी का सहयोग नहीं लिया गया। सबसे अधिक बरसात में सीमा पर पानी भरने व दलदल होने के कारण कई बार गश्त करने में दिक्कत आती है।