राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख स्वास्थ्य सचिव, महिला एवं बाल विकास सचिव और समेकित बाल विकास निदेशक को नोटिस जारी कर पूछा है कि बच्चों में कुपोषण को रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीतसिंह की खंडपीठ ने यह आदेश महेश शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि शहर की कच्ची बस्तियों खासकर कलाकार कॉलोनी में कुपोषण के चलते नवजात शिशुओं की मौत हो रही है। गर्भवती को पूरा पोषण नहीं मिलने के कारण यहां बच्चे अविकसित पैदा हो रहे हैं। याचिका में कहा गया कि तय मानकों के अनुसार एक हजार की आबादी पर एक आगंनबाडी कार्यकर्ता और एक आशा सहयोगिनी होनी चाहिए।
इनका काम गर्भवती महिलाओं व बच्चों को कुपोषण से रोकना होता है, लेकिन राज्य सरकार ने इनके पद ही स्वीकृत नहीं कर रखे हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि यूनिसेफ ने छह माह से पांच साल तक के बच्चों के पोषण की जांच के लिए एमयूएसी उपकरण की अनुशंषा की है। इस उपकरण को बच्चे की बांह पर बांधकर पोषण की जांच की जाती है, लेकिन राज्य के किसी भी अस्पताल में यह उपकरण ही उपलब्ध नहीं है।
याचिका में गुहार की गई है कि समेकित बाल विकास योजना के तहत आंगनबाडी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी की नियुक्ति के साथ-साथ हर अस्पताल में एमयूएसी उपकरण की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।