राजस्थान हाईकोर्ट ने खेल मैदानों की दयनीय हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि स्पोर्ट्स कौंसिल इनकी दशा सुधारने के लिए क्या कर रही है। अदालत ने एक बार फिर दोहराया कि खेल मैदानों में गैर खेल गतिविधियों का संचालन नहीं होना चाहिए। साथ ही अदालत ने प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।
वहीं अदालत ने कहा कि आरसीए चुनाव को लेकर रामपाल शर्मा की याचिका को निस्तारित किया जा चुका है। ऐसे में अब किसी प्रार्थना पत्र को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी पक्ष को आपत्ति है तो वह विधिनुसार अलग से याचिका दायर करे।
न्यायाधीश जेके रांका की एकलपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अभिनव शर्मा की ओर से विद्याधर नगर स्टेडियम के फोटो पेश कर कहा कि वहां हालात काफी दयनीय है। खिलाड़ी कई किलोमीटर दूर से आकर यहां प्रेक्टिस करते हैं, लेकिन प्रेक्टिस से पहले उन्हें मैदान को खेलने लायक बनाना पड़ता है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि स्टेडियम के हालातों की जानकारी लेने के दौरान उनके साथ कुछ लोगों ने हाथापाई की और उनके जूनियर वकील को डंडों से बीच सड़क पर पीटा गया। इस पर महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने विरोध करते हुए कहा कि यदि सच्चाई बताई जाएगी तो वे परेशानी में पड़ जाएंगे। अदालत चाहे तो वे इसका जवाब पेश करने को तैयार हैं।
वहीं आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत में रिकॉलिंग प्रार्थना पत्र दायर कर कहा कि आरसीए की ओर से लोकपाल और एथिक्स ऑफिसर को पद से नहीं हटाया गया है। इसकी जानकारी 25 जुलाई को लोकपाल जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्र को भी दी जाएगी। ऐसे में इस संबंध में पूर्व में दिए आदेश को वापस लिया जाए।