राजस्थान हाईकोर्ट ने किराया नियंत्रण अधिनियम में हुए संशोधन को लागू करने की तिथि को लेकर पैदा हुए कानूनी प्रश्न का अंत करते हुए कहा है कि किराया निर्धारण के संबंध में किए गए संशोधन को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। संशोधन को लागू होने की तिथि से ही किराया निर्धारित करने का यह प्रावधान लागू होगा।
मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश जेके रांका की खंडपीठ ने यह आदेश रविन्द्र सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अधिवक्ता अश्विनी चौबीसा ने बताया कि किराया नियंत्रण अधिनियम, 2001 में किराया पुनर्निधारण के संबंध में प्रावधान था। जिसके तहत एक जनवरी 1950 से पहले के मामलों में किराया सालाना साढे सात फीसदी बढ़ाकर हर दस साल में उसे मूल किराए में शामिल करना था। वहीं वर्ष 2003 के बाद किराया पांच फीसदी बढ़ाने का प्रावधान किया गया।
वहीं 22 फरवरी 2006 को इसमें संशोधन कर साढे सात फीसदी को भी पांच फीसदी कर दिया। इस संबंध में हाईकोर्ट में मामला आने पर एक एकलपीठ ने संशोधन को भूतलक्षी प्रभाव से लागू होने को सही बताया, जबकि दूसरी एकलपीठ ने कहा कि संशोधन का भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। दोनों अलग-अलग बिन्दुओं को तय करने के लिए प्रकरण को खंडपीठ में भेजा गया। जिसे तय करते हुए खंडपीठ ने कहा कि संशोधन की तिथि से ही उसे लागू किया जाएगा।