राजस्थान में पूर्णतया शराब बंदी लागू करवाने को लेकर पूर्व विधायक की गर्भवती पुत्र वधू अनशन पर बैठने की ठानी तो सरकार में हड़कम्प मच गया। धरने को रोकने के लिए विभाग की बैठक भी हुई, लेकिन पुत्र वधू ने बैठक का बहिष्कार किया।
दरअसल, संपूर्ण शराब बंदी आन्दोलन जस्टिस फॉर छाबडा संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूनम अंकुर छाबडा ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को एक पत्र भेज सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया था। उन्होंने पत्र में कहा कि 8 जून तक संपूर्ण शराब बंदी की मांग नहीं मानी तो वे 9 जून से अनशन पर बैठ जाएंगी। पूनम छाबड़ा इस समय प्रेग्नेंट है। ऐसी हालात में उनकी ये चेतावनी सरकार के लिए बेहद चिंताजनक हो सकती है। उन्होंने पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि इस अनशन के दौरान कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
यह पत्र मिलते ही सरकार सकते में आ गई। इसे लेकर हाई पावर कमेटी की बैठक सोमवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. अरूण चतुर्वेदी की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार और पूनम अंकुर छाबड़ा के साथ 5 नवम्बर, 2016 को हुए समझौते के तहत अब तक हुई कार्यवाही के बारे में जानकारी ली गई। मंत्री ने इस पर संतोष व्यक्त किया गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि समिति की बैठक नियमित रूप से बुलाई जाए ताकि समझौते के सभी बिंदुओं की समय पर पालना सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग अवैध शराब की दुकानों तथा हथकढ़ शराब बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें।
आबकारी आयुक्त ओपी यादव ने बताया कि समझौते के अनुरूप गुरूशरण छाबड़ा के जयपुर स्थित निवास के पास चम्बल पावर हाउस रोड का नामकरण गुरूशरण छाबड़ा के नाम पर किया जा चुका है। साथ ही छाबड़ा के मूल निवास स्थान सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) के राजकीय माध्यमिक विद्यालय, पुरानी आबादी का नामकरण भी ‘श्री गुरूशरण छाबड़ा राजकीय माध्यमिक विद्यालय‘ किए जाने की स्वीकृति जारी की जा चुकी है। बैठक में बताया गया कि सशक्त लोकायुक्त कानून को लेकर राजस्थान लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त संशोधन बिल-2014 की प्रक्रिया प्रगति पर है।
उधर, पूनम अंकुर छाबड़ा ने इस मीटिंग का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि मेरे साथ भी सरकार ने कई बार वादे किए, आश्वाशन दिया पर आज तक उन वादों पर कार्यवाही नहीं हुई और प्रदेश शराब मुक्त नहीं हुआ । जब तक शराब बंदी व सशक्त लोकायुक्त पर कोई बड़ा क़दम सरकार की तरफ़ से नहीं उठाया जाता तब तक उनसे कोई वार्ता नहीं होगी