उर्दू में रामायण को एक मौलवी ने 1935 में लिखा था। दिवाली पर इसका पाठ करने की परम्परा शुरू हुई जो आज भी जारी है। इस बार भी इस रामायण का पाठ हुआ।
राजस्थान के बीकानेर में हर साल दिवाली से पहले एक अनूठा आयोजन होता है। यह कार्यक्रम पर्यटन लेखक संघ और महफिल-ए-अदब संस्था करती है। इस आयोजन के दौरान उर्दू में लिखी इस रामायण का पाठ किया जाता है। रविवार को यह कार्यक्रम बीकानेर में आयोजित हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार, इस रामायण को वर्ष 1935 में लखनऊ के मौलवी बादशाह हुसैन राणा लखनवी ने बीकानेर में लिखी थी। उस वक्त यहां पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की ओर से अपनी मातृभाषा में कविता के रूप में रामायण लिखने की एक प्रतियोगिता आयोजित हुई थी। उस वक्त मौलवी राणा बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह के यहां उर्दू-फारसी के फरमान अनुवाद किया करते थे।