कोटा के श्रीनाथपुरम में रविवार को अपने ही दो मासूम बच्चों की जान लेने वाली मां को अब पछतावा हो रहा है।
एमबीएस अस्पताल में भर्ती मां मीनाक्षी बोली कि तीन साल की बेटी खुशी और डेढ़ साल का बेटा चिराग दोनों बहुत दिन से बीमार रहते थे। इसके चलते घर में काफी परेशानी रहती थी। इसी दौरान उनके उल्टी—दस्त हो गए। ऐसे में रोज—रोज डॉक्टरों के जाने से परेशान होकर मैने ही अपने बच्चों को गला दबाकर मार डाला। इसके बाद मैंने भी दीमक मारने वाली दवा पी ली। ये सोचकर कि तीनों को आए दिन की परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी। इसलिए मैंने ऐसा किया। इसमें मेरे अलावा किसी का दोष नहीं है। भगौनी में दूध नीला इसलिए हो गया क्योंकि उसमें साबुन था और उसमें दूध गर्म किया था।
उधर, मां की इस घिनौनी करतूत के बाद श्रीनाथपुरम—डी मार्बल मंडी के आसपास रहने वाले लोगों का घटना के बाद यही कहना था कि क्या कोई मां ऐसी भी हो सकती है जो अपने ही बच्चों के लिए काल बन गई। अस्पताल के बाहर मौजूद लोग भी घटना के बाद स्तब्ध थे। हर कोई यही कह रहा था कि जो मां अपने बच्चों की सगी नहीं हो सकी, वह क्या अपने पति की होगी। पति अजय भी मीनाक्षी के इस कदम की आलोचना करता सुनाई दिया। अजय का कहना था कि उसने तो सुबह काम पर जाने से पहले टिफिन लगाने को कहा था, इसके बाद दोनों में अनबन हो गई। उसे क्या पता था कि ये अनबन उसके बच्चों की जान ले लेगी। मामले में पुलिस अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।