दूसरों की गाड़ियां चलाकर अपने परिवार का पेट पालने वाले एक ड्राइवर ने स्कूली बच्चों के खेलने के लिए मैदान बन पाए, इसलिए अपनी 5 बीघा जमीन ही दान में दे दी।
बेहद गरीबी की हालत में जीने वाले मेजर अली का राजस्थान सरकार आगामी भामाशाह सम्मान समारोह कार्यक्रम में सम्मान हुआ। 23वें भामाशाह सम्मान समारोह में यहां राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मौजूदगी में मेजर अली का सम्मान हुआ, जो हर किसी के लिए किसी सपने से कम नहीं।
लोग चर्चा कर रहे हैं कि इस सम्मान को पाने के लिए जिन परिस्थितियों में मेजर ने जो कुर्बानी दी है वो हर किसी के बूते की बात नहीं।
इतनी बड़ी जमीन दान देने के पीछे ये रही प्रेरणा
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भामाशाह पुरस्कार पाते सीकर के मेजर अली
- फोटो : amar ujala
सीकर के लावंडा गांव निवासी 30 साल के मेजर अली के परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं जिनका भरण पोषण करने के लिए मेजर दूसरो की गाड़ी चलाकर महीने के 7 से 8 हजार रुपए तक का जुगाड़ कर लेता है। मेजर अली का बचपन भी बेहद गरीबी और तंगहाली में बीता जिसके कारण वो सिर्फ 11वीं कक्षा तक ही पढ़ पाया।
मेजर जिस सरकारी स्कूल से पढ़ा है, वहां बच्चों के लिए खेलने के मैदान की जगह कम है। मेजर अली खुद भी इस परेशानी से गुजर चुका है ऐसे में उसने अपनी 30 लाख रुपए की कीमत वाली 5 बीघा पुश्तैनी जमीन को अपने भाईयों की सहमति के बाद सरकारी स्कूल को बच्चों के लिए खेल का मैदान बनाने के लिए दान में दे दी।
अब मेजर अली का सपना है कि मैदान बनने के बाद कोई एक बच्चा यहां से बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरे। गौरतलब है कि राज्यस्तरीय इस सम्मान समारोह कार्यक्रम में करीब 140 भामाशाहों का सम्मान किया गया, जिसमें राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी और पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की मौजूदगी में ये सम्मान समारोह आयोजित किया गया।