नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के होने वाले बच्चे को अपनाने के लिए आरोपी के परिजनों ने भरोसा दिलाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दुष्कर्म के आरोपी के परिजनों ने कहा कि वे पीड़िता के होने वाले बच्चे को अपनाएंगे। जस्टिस जीके व्यास और जस्टिस मनोज गर्ग की खंडपीठ में कल दुष्कर्म करने वाले आरोपी के माता-पिता पेश हुए।
आरोपी द्वारा दुष्कर्म करने के बाद पीड़िता गर्भवती हो गई थी, जिसकी उम्र को देखते हुए कोर्ट ने गर्भपात की अनुमति नही दी थी। इस पर आरोपी के माता-पिता से कोर्ट ने पूछा था कि पीड़िता के होने वाले बच्चे को कौन अपनाएगा। इसके बाद कल आरोपी के माता-पिता ने कोर्ट में पेश होकर कहा कि हम उसे अपनाएंगे और अपने परिवार का नाम भी देंगे। अब आरोपी के अभिभावक के हलफनामे को स्वीकार कर खण्डपीठ ने दो सप्ताह बाद मामले की सुनवाई रखी है।
गौरतलब है कि मामले के अनुसार 14 वर्षीय नाबालिग को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया गया था। जिसकी रिपोर्ट आसिंद पुलिस थाने में 19 जुलाई 2016 को दायर करवाई गई थी। इसके बाद पीड़िता के 164 के तहत बयान कराए और कोर्ट में पेश किया गया था। पीड़िता के गर्भवती होने की वजह से कोर्ट ने जिला विधिक प्राधिकरण को तीन लाख रुपए की सहायता के भी आदेश दिए थे।