बाड़मेर के काश्मीर गांव में स्थानीय लोग करीब ढाई महीने से शोक मना रहे है। होली आई लेकिन, फीकी रही। दूसरे तीज—त्योहारों की रौनक भी यहां इस दौरान देखने को नहीं मिली। एक परिवार तो ऐसा है जिसके घर में चूल्हा भी नहीं जल रहा।
दरअसल बाड़मेर से करीब 70 किलोमीटर दूर काश्मीर गांव का रहने वाला 36 वर्षीय राजूदास पुत्र भगदास मजदूरी के लिए सऊदी अरब गया था। इसी दौरान इसी साल फरवरी में खबर मिली कि उसकी वहां मौत हो गई। इसके बाद से परिजनों का रो—रोकर बुरा हाल है। वे अपने बेटे का शव अपने देश में लाने के लिए प्रशासन को गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई मदद नहीं मिल रही है।
अपने बेटे का इंतजार कर रही मां धापु देवी (60) और पत्नी गुड्डी देवी जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचा चुकी हैं। उनकी हालत देखकर अब तो गांव के लोग भी जितना प्रयास कर सकते हैं कर रहे हैं, पर कहीं से मदद नहीं मिल रही। घर के सदस्य के शव का इंतजार कर रहे परिजनों ने पिछले 76 दिन से चूल्हा नहीं जलाया। उनके खाने—पीने का इंतजाम भी आसपड़ोस के लोगों की ओर से ही किया जा रहा है।
राजूदास के छोटे भाई कुंभदास का कहना है कि विदेश मंत्रालय में भी अर्जी लगाई, लेकिन अब तक उनके भाई का शव वतन वापस नहीं लाया जा सका है। अब तो हमारी भी हिम्मत टूटती जा रही है पर क्यों करें। यदि हम टूट जाएंगे तो छोटे बच्चे रमेश और बेटी कविता का क्या होगा, यही सोचकर रह जाते हैं। पिता भगवानदास ने रोते हुए बताया कि बेटे का 19 फरवरी को निधन हुआ था। तभी से आज तक उसके शव को वतन की मिट्टी नसीब नहीं हो रही।