जानकारी के मुताबिक, छह दिन दिल्ली में रहने के बावजूद सचिन पायलट और पार्टी हाईकमान की मुलाकात न होने के बाद राजस्थान में सियासी अटकलें शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नंबर गेम में बाजी मार रहे हैं। ऐसे में सचिन पायलट के खेमे की मांगों को तवज्जो नहीं दी जा रही है।
बता दें कि राजस्थान में छिड़े सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने एक-दूसरे के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला है। हालांकि, दोनों के समर्थक लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि सचिन पायलट के जयपुर लौटने के बाद अब राजनीतिक हलचल भी जयपुर शिफ्ट हो गई। दरअसल, जब पायलट शुक्रवार को दिल्ली आए थे, तब से सबकी नजरें दिल्ली पर ही टिकी हुई थीं। गौर करने वाली बात यह है कि सचिन पायलट कैंप को प्रियंका गांधी या गांधी परिवार के किसी भी नेता से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। हालांकि, अजय माकन ने सब कुछ ठीक होने का बयान दिया था, लेकिन राज्य के सियासी घमासान के लिए वह नाकाफी लग रहा है।
सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट की दिल्ली यात्रा को लेकर काफी कयास लगाए जा रहे थे। माना जा रहा हथा कि पंजाब की तर्ज पर पायलट खेमे की मांगों को भी सुना जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब सचिन पायलट और गहलोत खेमे के बीच खींचतान और ज्यादा बढ़ने के आसार बन गए हैं। दरअसल, पायलट खेमा अगस्त 2020 में बगावत के बाद हुई सुलह के वक्त तय बातों को लागू करने की मांग कर रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसे मानने को तैयार नहीं हैं।