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सियासी घमासान: प्रियंका से मिले बिना छह दिन बाद बैरंग लौटे सचिन पायलट, भारी पड़ा गहलोत का नंबर गेम

Thu, 17 Jun 2021 12:27 AM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

बता दें कि पायलट शुक्रवार (11 जून) को दिल्ली आए थे। इसके बाद उनके समर्थक विधायकों और सीएम अशोक गहलोत खेमे के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही।
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सचिन पायलट - फोटो : @SachinPilot
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विस्तार
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राजस्थान कांग्रेस में चल रहे सियासी घमासान का कोई समाधान नहीं निकल सका। अपनी मांगों को लेकर दिल्ली आए पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को प्रियंका गांधी वाड्रा से मिले बिना ही बैरंग लौटना पड़ गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का नंबर गेम उन पर भारी पड़ गया। बता दें कि पायलट शुक्रवार (11 जून) को दिल्ली आए थे। इसके बाद उनके समर्थक विधायकों और सीएम अशोक गहलोत खेमे के बीच तीखी बयानबाजी जारी रही।

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राजस्थान में शुरू हुईं सियासी अटकलें

जानकारी के मुताबिक, छह दिन दिल्ली में रहने के बावजूद सचिन पायलट और पार्टी हाईकमान की मुलाकात न होने के बाद राजस्थान में सियासी अटकलें शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नंबर गेम में बाजी मार रहे हैं। ऐसे में सचिन पायलट के खेमे की मांगों को तवज्जो नहीं दी जा रही है।

अब जयपुर शिफ्ट हुई राजनीतिक हलचल

बता दें कि राजस्थान में छिड़े सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने एक-दूसरे के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला है। हालांकि, दोनों के समर्थक लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि सचिन पायलट के जयपुर लौटने के बाद अब राजनीतिक हलचल भी जयपुर शिफ्ट हो गई। दरअसल, जब पायलट शुक्रवार को दिल्ली आए थे, तब से सबकी नजरें दिल्ली पर ही टिकी हुई थीं। गौर करने वाली बात यह है कि सचिन पायलट कैंप को प्रियंका गांधी या गांधी परिवार के किसी भी नेता से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। हालांकि, अजय माकन ने सब कुछ ठीक होने का बयान दिया था, लेकिन राज्य के सियासी घमासान के लिए वह नाकाफी लग रहा है।
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पायलट-गहलोत खेमों में खींचतान बढ़ने का अनुमान

सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट की दिल्ली यात्रा को लेकर काफी कयास लगाए जा रहे थे। माना जा रहा हथा कि पंजाब की तर्ज पर पायलट खेमे की मांगों को भी सुना जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब सचिन पायलट और गहलोत खेमे के बीच खींचतान और ज्यादा बढ़ने के आसार बन गए हैं। दरअसल, पायलट खेमा अगस्त 2020 में बगावत के बाद हुई सुलह के वक्त तय बातों को लागू करने की मांग कर रहा है। वहीं, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसे मानने को तैयार नहीं हैं। 
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