राजस्थान हाईकोर्ट ने वाणिज्यिक कर विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी की एक साल की काटी गई दस फीसदी पेंशन राशि नौ फीसदी ब्याज सहित लौटाने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग के संबंधित अफसरों पर 25 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। अदालत ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव को भेजते हुए कहा है कि वह प्रकरण से जुड़े वित्त सचिव प्रवीण गुप्ता के सेवा रिकॉर्ड में रिमार्क लगाए।
अदालत ने मुख्य सचिव को यह भी कहा है कि वे उन अफसरों पर कार्रवाई करें, जिनके कारण रिटायर्ड कर्मचारी को अदालत आना पड़ा। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश मूलचंद शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता एनएल वर्मा ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग में यूडीसी पद पर कार्य के दौरान याचिकाकर्ता एसीबी की ट्रेप कार्रवाई में गवाह बना था। ट्रायल के दौरान याचिकाकर्ता को पक्षद्रोही घोषित कर दिया।
इस पर एसीबी ने विभाग को 3 मई 2011 को पत्र लिखकर याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा। वहीं 8 अक्टूबर 2014 को एसीबी कोर्ट ने प्रकरण का निस्तारण कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता के खिलाफ कुछ नहीं लिखा। याचिका में कहा गया कि वाणिज्यिक कर विभाग ने तीस सितंबर 2014 को याचिकाकर्ता की एक साल की पेंशन की दस फीसदी राशि रोक ली।
इस आदेश के खिलाफ विभागीय अपील को भी अपीलीय अधिकारी ने 16 फरवरी 2015 को खारिज कर दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि अपीलीय अधिकारी ने समान मामले में एक अन्य कर्मचारी की अपील स्वीकार कर ली। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने काटी गई पेंशन राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश देते हुए संबंधित अफसरों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।