राजस्थान हाईकोर्ट आरएएस भर्ती-2016 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को संशोधित कर नए सिरे से चयन प्रक्रिया आरंभ करने के एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने आरपीएससी को साक्षात्कार जारी रखने की छूट देते हुए कहा है कि बिना अनुमति अभ्यर्थियों को नियुक्तियां नहीं दी जाए। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि आरपीएससी के पदाधिकारियों पर अवमानना का मामला नहीं बनता है।
न्यायाधीश अजय रस्तोगी और न्यायाधीश अशोक गौड़ की खंडपीठ ने यह आदेश आरपीएससी की ओर से दायर अपील पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए। अपील में कहा गया कि प्रारंभिक परीक्षा में एसबीसी को आरक्षण देने पर एकलपीठ ने गत 26 अगस्त को आदेश जारी कर प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करने के आदेश दिए थे। अपील में कहा गया कि आयोग की ओर से गत एक दिसंबर को जारी परीक्षा परिणाम विधि सम्मत था, क्योंकि हाईकोर्ट ने एसबीसी आरक्षण अधिनियम प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद 9 दिसंबर 2016 को रद्द किया था।
वहीं निधिशेखर शर्मा के मामले में अदालत ने 18 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल करने को कहा था, लेकिन परीक्षा में शामिल सभी 12 अभ्यर्थी फेल हो गए। इसके अलावा मानसी तिवाड़ी ने मुख्य परीक्षा के बाद याचिका दायर की है। ऐसे में एकलपीठ का आदेश गलत है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए साक्षात्कार लेने की छूट देकर बिना अनुमति नियुक्तियां पर रोक लगाई है।
गौरतलब है कि एकलपीठ ने निधिशेखर शर्मा व मानसी तिवाडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 26 अगस्त को प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी करने के साथ-साथ आरपीएससी पर अवमानना की कार्रवाई आरंभ करने को कहा था।