शहरों से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस का अमानवीय चेहरा आम लोगों के लिए कोई नया नहीं है। लेकिन जब किसी प्रदेश की राजधानी में तमाम आला अधिकारियों के नीचे पुलिस शर्मसार करने वाली हरकतें करें, तो यह चिंता की बात अवश्य है।
मामला मंगलवार का है जब जयपुर के महेश नगर थाने में नवीं की छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने उसकी मां थाने पहुंची। पीड़ित नाबालिग बेटी और उसकी मां को पहले तो पुलिसकर्मीयों ने गाड़ी उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर थाने में बैठाकर रखा।
उसके बाद पुलिसकर्मी पीड़िता का मेडिकल करवाने थाने से उन्हें पैदल लेकर निकले और आगे जाकर एक अॉटो किया, जिससे वे अस्पतला पहुंचे। इस दौरान जब थाने के एसआई रामवतार गाड़ी लेकर आए, तो पुलिसकर्मीयों ने उन्हें मामले की जानकारी दी।
लेकिन दरोगा साहब ने मानवता को ताक पर रखकर कह दिया कि उन्हें किसी मारपीट के मामले के लिए जाना है, इसलिए वह गाड़ी नहीं दे सकते हैं।
पुलिसकर्मियों की हरकतों से परेशान मां बोली...
फाइल फोटो।
पुलिसवालों की हरकतों से परेशान मां ने गुहार लगाई कि वे आॅटो से भी अस्पताल चलने को तैयार है। जब अॉटो से पीड़िता और इसकी मां अस्पताल पहुंचे, तो उसके बाद भी उनकी परेशानी कम नहीं हुई।
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भी मां-बेटी को कोई सहायता नहीं मिली। यहां भी मेडिकल कराने के लिए उन्हें करीब दो घंटे इंतजार करना पड़ा।
इस दुष्कर्म का पता मंगलवार को तब चला जब बेटी ने मां को आप बीती सुनाई। दरअसल नाबालिग से रविवार देर रात्रि का है जब महेश नगर में अपनी मां व दो बहिनों के साथ किराए पर रहने वाली एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया।
पीड़िता के घर पर अकेले होने का फायदा उठाकर आरोपी ने दुष्कर्म किया था।
अब मानवाधिकार आयोग करेगा हस्तक्षेप...
फाइल फोटो
दुष्कर्म का आरोप उसी मकान में रहने वाले युवक जमील पर है। दुष्कर्म के बाद उसने नाबलिग को डराया-धमकाया कि वह उसे जान से मार देगा। इस डर से नाबालिग ने एक दिन तो मामला दबाए रखा।
लेकिन जब उसने सोमवार को फिर से जबरदस्ती का प्रयास किया, तो नाबालिग के चिल्लाने पर वह भाग गया। इसके बाद बच्ची ने अपनी मां को सारी जानकारी दी थी।
वहीं पुलिस ने आरोपी जमील को हिरासत में ले लिया है और आगे की जांच प्रारंभ कर दी है।