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Rajasthan: जबड़े में गर्दन दबोचकर 500 मीटर दूर तक खींचा, शोर मचाने पर जंगल में भागा, मासूम की मौत

Sat, 11 Feb 2023 07:28 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान के जयपुर में जमवारामगढ़ के टोडा मीणा एरिया में डेढ़ साल के बच्चे को लेपर्ड ने अटैक कर मार डाला। घटना शुक्रवार रात की है। लेपर्ड 500 मीटर दूर तक जबड़े में बच्चे की गर्दन दबोचकर उसे खींचकर ले गया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर गंभीर घायल हालत में उसे छोड़कर लेपर्ड जंगल में भाग गया और बच्चे ने दम तोड़ दिया।
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मासूम की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जयपुर जिले में जमवारामगढ़ के टोडा मीणा क्षेत्र में करीब 17 महीने का बच्चा अपने घर के बाहर पालतू कुत्ते के बच्चे के साथ खेल रहा था। तभी एक लेपर्ड जंगल से आया और बच्चे को दबोच लिया। ग्रामीणों के चिल्लाने और भगेरे को मारने दौड़ने पर वह बच्चे को घायल करके चला गया। ग्रामीण तुरंत बच्चे को नजदीकी निम्स अस्पताल लेकर गए। लेकिन वहां बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया।

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कांग्रेस विधायक गोपाल मीणा के गांव टोडा मीणा में यह घटना हुई है। अमर उजाला से बातचीत में विधायक गोपाल मीणा ने बताया कि बच्चे के पिता का नाम बलराम योगी है और मां काली देवी है। जब पैंथर आया तो बच्चे की मां बर्तन मांज रही थी और बच्चा कुत्ते के साथ खेल रहा था। संभवतया लेपर्ड ने कुत्ते पर अटैक किया,लेकिन कुत्ता वहां से भाग छूटा तो उसने बच्चे पर झपट्टा मार दिया। फिर उसने बच्चे की गर्दन मुंह में दबोच ली, उसके दांत गड़ने से बच्चे के गले में गंभीर घाव हो गया।

बच्चे को जबड़े से खींचता हुआ लेपर्ड करीब 500 मीटर दूर तक ले गया। जहां बावरियों के परिवार ने हल्ला मचा दिया, तो पैंथर उस बच्चे को गम्भीर घायल हालात में छोड़कर जंगलों में भाग गया। इसके बाद बच्चे को चंदवाजी स्थित निम्स अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शनिवार सुबह बच्चे का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। प्रशासन के जरिए मृत बच्चे के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलवाई जाएगी।
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कलेक्टर से फोन पर बात की...
विधायक ने बताया, बच्चे के पिता दिव्यांग हैं। उन्होंने कहा कि मैं बाहर एक शादी समारोह में आया हुआ था, लेकिन घटना की सूचना मिलने पर कलेक्टर और प्रशासन को फोन कर दिया था। तुरंत प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे।

दरअसल, छह फरवरी से ही वनकर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिसके कारण वन क्षेत्र में ट्रेकिंग, मॉनिटरिंग, सर्विलांस और रेस्क्यू का काम ठप पड़ा है, जिसके चलते वन्य जीव आबादी इलाको में आकर ग्रामीणों को चोटिल कर रहे हैं। अगर वनकर्मी हड़ताल पर नहीं होते तो शायद समय पर बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

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