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नेपाल के रास्ते चीन से होती थी 'मौत की डोर' की स्मगलिंग, अब और बिगड़े हालात

Sat, 06 Jan 2018 02:48 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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मांझा तैयार करते हुए - फोटो : फाइल फोटो
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पांच साल में करीब बारह जान ले चुकी मौत की एक एेसी डोर ने यहां फिर पैर पसार लिए हैं। इस मौत के मांझे ने एक और जान ले ली है। मकर संक्रांति के माहौल में ये धारदार चाइनीज मांझे का कहर और भी नुकसान पहुंचा सकता है। अब सवाल यह उठता है कि जब चाइनीज मांझे की बिक्री पर रोक है, तो लोगों के हाथ में पहुंच कैसे रहा है। इसकी बिक्री पर लगाम लगाने में प्रशासन नाकाम कैसे रह रहा है।
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जानकारों के अनुसार चाइनीज या धारदार मांझे की सप्लाई की कहानी कुछ साल पुरानी है। पहले चाइनीज डोर दूसरे राज्यों के जरिए राजस्थान में आती थी। इसके नुकसान सामने आने लगे तो इस पर प्रतिबंध लग गया। इसके बाद नेपाल के रास्ते होकर इसकी सप्लाई जारी रही। अब जब वहां भी सख्ती हो गई। करीब दो साल पहले एक साथ तीन चार लोगों की जान गई तो हड़कम्प मच गया।

अब यहां लग गई हैं मौत की 'फैक्ट्रियां'

मांझा और पतंग - फोटो : अमर उजाला
कई लोगों की जान जाने के बाद तब तफ्तीश में सामने आया कि चाइनीज मांझा की तर्ज पर ही देश में ही तेज धार वाले मांझा बनना शुरू हो गया है। ये चेन्नई, बरेली, मुरादाबाद में हो रहा है। इसके अलावा जयपुर और आस पास भी चोरी छिपे इसके होने की सुचनाएं हैं।

अब बात जयपुर की करें तो जयपुर में इस तरह का मांझा मांग के मुताबिक तैयार होता है। स्पेशल ऑर्डर दिया जाता है, तब जाकर खास मांझा बनता है। मांझे की डबल सुताई की जाती है। कांच और मैटल बुरादे के मिक्सचर से सुताई होती है।
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अब इस कोड वर्ड से हो रहा है काम

पतंगबाजी - फोटो : फाइल फोटो
चाइनीज मांझे के जैसा मांझा मांगने के लिए एक कोड वर्ड प्रचलित हो चुका है। इन दिनों बाजार में एक नए तरह का मांझा मौजूद है। इसे बैलून डोर के नाम से जाना जाता है। ये धागा भी आसानी से नहीं टूटता है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में मकर संक्रांति से ठीक पहले अभियान चलाकर कई रील चाइनीज मांझा जब्त किया जाता है, लेकिन ये फिर दुकानों से होते हुए बच्चों के हाथों तक पहुंच रहा है।
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