राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के प्रकरण में घटना के एक माह बाद पीड़िता का जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में म्यूनिसिपल कौंसिल बारां के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार को 22 फरवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश केएस अहलुवालिया की एकलपीठ ने यह आदेश महिपाल उर्फ लाला की ओर से दायर आपराधिक अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अपील में अधिवक्ता वाईसी शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में कोटा की पोक्सो मामलों की विशेष अदालत ने गत 28 मई को सात साल की सजा सुनाई थी। अपील में विशेष न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया कि पीड़िता के बयानों से स्पष्ट है कि वह अपीलार्थी के साथ स्वेच्छा से गई थी।
इसके अलावा अभियोजन पक्ष ने विशेष न्यायालय में म्यूनिसिपल कौंसिल के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार की ओर से 23 मई 2016 को जारी पीड़िता का जन्म प्रमाण पत्र पेश किया था। जिसमें पीड़िता का जन्म सन् 2000 बताया गया है। अपील में कहा गया कि रजिस्ट्रार ने दुष्कर्म की घटना होने के एक माह बाद यह प्रमाण पत्र जारी किया है। इसके अलावा प्रमाण पत्र में पीड़िता के पिता को स्वर्गीय दर्शाया गया है। जबकि उसकी मौत वर्ष 2013 में हुई थी। ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र के फर्जी होने का संदेह होता है।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले रजिस्ट्रार को 22 फरवरी को समस्त रिकॉर्ड सहित पेश होने के आदेश दिए हैं।