हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और सामुहिक दुष्कर्म के दर्ज होने वाले झूठे मामलों को लेकर बड़ी टिप्पणी की है और एक मामले में निचली अदालत से 10-10 साल की सजा पाने वाले दो भाइयों को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पीड़िता के बयानों में कुछ भी संशय पाया जाए, तो उसके बयानों को साक्ष्यों के आधार पर जांच की जानी चाहिए।
राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा है कि दुष्कर्म के प्रकरणों में पीड़िता के बयानों को अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखने का कोई नियम नहीं है, लेकिन यदि आरोपी के साथ उसकी दुश्मनी, पीड़िता की सहमति, उसके बयानों में विरोधाभास और यदि मेडिकल जांच में दुष्कर्म नहीं पाया जाए, तो पीड़िता के बयानों के साथ-साथ अन्य साक्ष्य को कड़ी के रूप में जोड़ कर देखा जाना चाहिए।
इसके साथ ही अदालत ने मामले में निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए अपिलार्थीयो को बरी कर दिया है। न्यायाधीश गोवर्धन बाढ़दार की एकलपीठ ने यह आदेश रमेश और सुरेश की ओर से दायर आपराधिक याचिका की सुनवाई कर करते हुए दिए।