राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा विभाग ने अलग—अलग स्थानों पर निर्माण को लेकर जारी किए एक टेंडर पर रोक लगा दी है। हालांकि अदालत ने विभाग को ये रियायत दी है कि वह चाहे तो निर्माण के लिए अलग-अलग टेंडर जारी कर सकता है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश मैसर्स रूपा एंड कंपनी सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाओं में कहा गया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग-अलग स्थानों पर पीएचसी निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया। विभाग की ओर से सभी जगहों की निर्माण लागत को जोडते हुए कुल करीब 21 करोड रुपए की राशि का एक ही टेंडर जारी किया गया। जिसके चलते छोटे कॉन्ट्रेक्टर टेंडर प्रक्रिया से दूर हो गए। इसके अलावा राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड रहा है।
सुनवाई के दौरान विभाग के अधिकारी अदालत में पेश हुए। अदालत ने पूछा कि किस नियम से अलग-अलग निर्माण के लिए एक ही टेंडर जारी किया गया है। जिसका जवाब देते हुए अधिकारी ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता के लिए एक ही टेंडर जारी किया गया है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कैसे कहा जा सकता है कि कोई व्यक्ति यदि उचित दर पर काम करता है तो उसमें अच्छी गुणवत्ता नहीं होती। इसके साथ ही अदालत ने निकाले गए एक ही टेंडर पर आगामी कार्रवाई पर रोक लगाते हुए सरकार को छूट दी है कि वह चाहे तो अलग-अलग टेंडर निकाल सकती है।