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महाराष्ट्र के बिल का हवाला देकर घिरी राजस्थान सरकार, दोनों के बिल में है भारी अंतर

Tue, 24 Oct 2017 11:18 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान विधानसभा
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लोकसेवकों को बचाने के लिए राजस्थान विधानसभा में सोमवार को एक बिल लाया गया है। लेकिन इस विवादित बिल पर राजस्थान सरकार को अपनों से लेकर विपक्ष तक हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
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सदन में बिल को पेश करने वाले राजस्थान के गृहमंत्री ने तर्क दिया है कि राजस्थान में पेश 'दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017' महाराष्ट्र में लाए गए बिल की तर्ज पर है। लेकिन गृहमंत्री शायद भूल गए कि महाराष्ट्र में जो बिल लाया गया था उसमें मीडिया की आजादी पर कोई बैन नहीं है। जबकि राजस्थान में जो बिल लाया गया है उसमें दो साल की सजा का प्रावधान है।

वहीं राजस्थान के बिल में अभियान स्वीकृति के लिए 180 दिन की समयावधि तय की गई है। जबकि महाराष्ट्र में यह समयावधि मात्र 90 दिन की है।
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विपक्ष को मिल गया है मुद्दा

गुलाबचंद कटारिया।
राजस्थान सरकार के इस विवादित बिल पर सोमवार को विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सदन से सड़क तक हुए प्रदर्शन के बाद सरकार के रुख में शाम तक कुछ नरमी जरुर देखी गई। राजस्थान सरकार अब बिल पर पुनर्विचार करने की बात कह रही है।

हालांकि विपक्ष का कहना है कि भ्रष्ट लोकसेवकों को बचाने के लिए लाए गए इस बिल को सरकार को वापस लेना पड़ेगा नहीं तो प्रदर्शन जारी रहेंगे। 
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