राजस्थान के चिकित्सा मंत्री रहे रघु शर्मा अब गुजरात में कांग्रेस के प्रभारी हैं। इसी साल होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव की तैयारी रघु शर्मा की देख-रेख में ही हो रही है। यह बात अलग है कि रघु शर्मा जब से गुजरात के प्रभारी बने हैं, तब से गुजरात में कांग्रेस के नेताओं के इस्तीफे का दौर चल रहा है। इन इस्तीफों के पीछे रघु शर्मा का घमंडी स्वभाव भी बताया जा रहा है।
गुजरात के कांग्रेस नेताओं ने रघु शर्मा के व्यवहार को लेकर आलाकमान से शिकायत भी की है, लेकिन सीनियर आब्र्जवर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संरक्षण के कारण कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है। 4 सितंबर को ही गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह बाघेला ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वहीं, रघु ने राजस्थान में अपने पुत्र सागर शर्मा को यूथ कांग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष बनवाने में सफल रहे। यानी रघु को गुजरात की राजनीति से ज्यादा अपने परिवार की चिंता है। इससे पहले भी हार्दिक पटेल जैसे युवा चेहरों ने कांग्रेस छोड़ी है।
जानकारों की माने तो आलाकमान पर दबाव डालकर ही रघु शर्मा ने अपने बेटे का मनोनयन करवाया हे। रघु की ख्वाहिश है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में केकड़ी (अजमेर) से बेटे को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया जाए। यहां तक खुद का सवाल है तो स्वयं को राज्यसभा सांसद बनवाने की फिराक में हैं। रघु के सपने कितने पूरे होते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन केकड़ी के मतदाता पिता-पुत्र दोनों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रघु के गुजरात में व्यस्त होने के कारण बेटा है।
बता दें कि कांग्रेस में विधायक की भूमि निभा रहे रघु शर्मा ने चिकित्सा मंत्री रहते हुए केकड़ी में गुड़ की गजक बनाने वालों पर भी छापे डलवाए। वहीं, बेटे ने नगर पालिका के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को निलंबित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केकड़ी के लोग बेटे का भी घमंड देख रहे हैं।
सीताराम लांबा ने सागर शर्मा की नियुक्ति का विरोध करते हुए ट्वीट करके युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवासन बीवी और युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी कृष्णा अलावेरू से भी सवाल पूछा है। सीताराम लांबा ने ट्वीट करते हुए लिखा, क्या यही भारतीय युवा कांग्रेस का आंतरिक लोकतंत्र बचा है। जो भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्य भी नहीं, वो बिना संगठन चुनाव के सीधे प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए गए हैं, शीर्ष नेतृत्व से निवेदन है कि सूची पर पुनर्विचार करें।