खेमों में बंटी हुई राजस्थान की बीजेपी इकाई में न तो कार्यकर्ता दिखाई दिए और न ही कोई जश्न मना। अगर सरदारशहर उपचुनाव कारण है तो संभव नहीं, क्योंकि बीजेपी को पहले दिन से पता था कि सरदारशहर विधानसभा उपचुनाव नहीं जीता जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, सरदारशहर विधानसभा में बीजेपी को अच्छा उम्मीदवार भी नहीं मिला था। इसलिए अशोक पिंचा की ही बलि दे दी गई, लेकिन गुजरात में प्रचंड जीत के बाद भी प्रदेश कार्यालय पर मायूसी दर्शाती है कि प्रदेश संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच की खाई और गहरी होती जा रही है, जिसको पाटने के लिए अब कोई नारा, कोई आंदोलन नहीं चलेगी कोई और ही व्यवस्था करनी होगी।
बीजेपी आलाकमान को हालांकि प्रदेश अध्यक्ष ने एक वीडियो जरूर जारी किया है, जिसमें गुजरात की जीत का विवरण दिया है। लेकिन उनके राज में बीजेपी प्रदेश कार्यालय की उदासी और बेबसी भी उनको देखनी होगी। सरकार बनाने के दावों से सरकार नहीं बनती है, अब समझने का समय आ चुका है।
बीजेपी का प्रदेश कार्यालय का सुनापन दर्शा रहा है कि बीजेपी की 2023 की तैयारियां किस कदर जोर-शोर से चल रही हैं। प्रदेश कार्यालय खाली, जन आक्रोश यात्रा में जनता गायब और उपचुनाव में वोट गायब बीजेपी के लिए संकेत हैं। जो जितने जल्दी समझ आ जाए, उतना समय बचेगा और चुनाव में आसानी रहेगी।