राजनीतिक गलियारों में जय सियाराम और जय श्रीराम को लेकर घमासान देखने को मिल रहा है। वहीं, कांग्रेस जय सियाराम बोलने के लिए कहती है तो बीजेपी जय श्रीराम बोलने के लिए कहती है। लेकिन इन्हीं बातों को लेकर घनश्याम तिवाड़ी ने कांग्रेस नेताओं को फटकार लगाई है।
तिवाड़ी ने कहा, राम भारत की संस्कृति और जीवन से जुड़े राम से अलग होने का खामियाजा कांग्रेस भुगत चुकी है। कांग्रेस रामसेतु का अस्तित्व नकार चुकी है, राम को कांग्रेसी काल्पनिक पात्र मानते थे। मगर अब सब कुछ राम के भरोसे करने लगे हैं। राम के नाम पर वन गमन पथ तक बनाने लगे हैं, उन्हें देर से ही सद्बुद्धि आई। मगर आई जरूर, कांग्रेस को पता नहीं कि दोनों एक ही शब्द हैं। जय सियाराम और जय श्रीराम दोनों एक ही शब्द हैं।
उन्होंने बताया, श्री शब्द लक्ष्मी जी का सूक्त ऋग्वेद में, श्री ही क्लीं, व्याकरण में सदैव स्त्रीलिंग है। जय सियाराम बोलना ही जय श्री राम बोलना है। यह कांग्रेस के नेताओं की समझ के बाहर जय श्रीराम आक्रामकता का प्रतीक नहीं, कांग्रेस के देखने का दृष्टिकोण मात्र है। राम, सिया लक्ष्मी और विष्णु शिव पार्वती वैदिक परंपरा में इन्हें एक स्वरूप में ही माना जाता है। सीता जी भी लक्ष्मी का ही अवतार है, इसलिए श्री शब्द सीता जी के लिए कहा गया जाता है। राष्ट्र समाज परिवार में लक्ष्मी की कामना की जाती रही है। भगवान राम भारतीय संस्कृति के अग्रदूत हैं, भगवान राम का अस्तित्व जीवन से लेकर मृत्यु तक है।
वीएचपी ने किया समर्थन...
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता अमितोष पारीक ने जय सियाराम या जय श्रीराम दोनों का समर्थन करते हुए कहा, आज जय सियाराम के नारे वह लगाने को कह रहे हैं, जिन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भगवान राम के अस्तित्व का प्रमाण मांगा था। देखा जाए तो चुनावी काल में आज वह लोग जय सियाराम के नारे लगाने को कह रहे हैं, जिन्होंने निरंतर रूप से भगवान श्रीराम और माता सीता का अपमान करा हो। अपितु हिंदू अब एक हो चुका है। जो भी राष्ट्र के मंगलमय की कामना रखता हो, वह हमारे लिए राम की भांति है और इसीलिए हम जय सियाराम जय-जयश्री राम दोनों का गर्व से और भाव विभोर होकर समर्थन करते हैं।