प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विभिन्न सड़कों को लोकर्पण करने के दौरान देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में से एक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को भी देश और देशवासियों को समर्पित कर दिया। कोटा में चम्बल नदी
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पर बने केबल पुल के 10 वर्ष पूर्व अटक जाने से ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर भी अधूरा था।
इस मिसिंग लिंक को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने सरकार ने पश्चिम से पूर्व को अब पूरी तरह से जोड़ दिया है। कोटा में चंबल नदी के पुल पर बना हैंगिंग ब्रिज यातायात और परिवहन के नजरिए से पूर देश के लिए खास महत्व रखता है। इस हैंगिंग ब्रिज के उद्घाटन होने के बाद अब वाहन चालक समय,डीजल और जाम से बचाएगा।
नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार कोटा के हैंगिंग ब्रिज से रोजाना 4 से 5 हजार ट्रक गुजरेंगे जिन्हें अब तक शहर के बीच में से होकर गुजरना पड़ता था लिहाजा ट्रकों की वजह से पूरा जाम की समस्याओं से जूझ रहा था।
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10 लीटर रोजाना और सालभर का 1.46 करोड़ रुपए डीजल बचाएगा
पीएम का भाषण सुनने के लिए कोटा हैंगिंग ब्रिज पर जमा भीड़
- फोटो : amar ujala
चंबल नदी पर बने 1.4 किलोमीटर लंबे हैंगिग ब्रिज देश के कोने कोने में माल पहुंचाने वाले ट्रक चालकों को बड़ी राहत देगा ये ना सिर्फ देश के पूर्वी भाग को पश्चिमी भाग से जोड़ेगा बल्कि ट्रक चालकों का रोजना करीब 10 लीटर डीजल भी बचाएगा और यदि सालभर की बात करें तो औसतन 1.46 करोड़ रुपए के डीजल की बचत की जा सकती है। ब्रिज के बनने से कोटा से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहनों का समय भी काफी बचेगा। बताया जाता है कि एक गाड़ी का कम से कम 1 घंटा बचेगा और बिना जाम मिले वो शहर से बायपास हो जाएगा।
कोटा हैंगिंग ब्रिज पर लोड टेस्ट करते ट्रक
- फोटो : amar ujala
ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर बन जाने से अब पश्चिमी भारत से पूर्वी भारत सीधे तौर पर जुड़ गया है। जानकारी के अनुसार अब गुजरात के मुख्य समुद्री तट पोरबंदर से आसाम के सिल्चर तक 58 घंटे में ही पहुंचा जा सकेगा। यह मार्ग पोरबंदर, राजकोट, समाखियानी, राधनपुर, माउंटआबू, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ कोटा तक आएगा और यहां से शिवपुरी, झांसी, अकबरपुर, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर, बिहार के मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज, इस्लामपुर, सिलिगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दिसपुर, डाबका, लुमडिंग, हाफलोंग होते हुए सिलचर तक जाएगा।