शहर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-12 ने चोरी से जुडे मामले में आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को चालान के साथ पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस कमिश्नर और डीजीपी को कानोता थाने से जुडे एसीपी, थानाधिकारी और जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने यह आदेश मनीष और नितिन शर्मा की जमानत अर्जियों को खारिज करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी, थानाधिकारी और चालानी आदेश देने वाले एसीपी के लिए जरूरी होता है कि वह अदालत में नतीजा देते समय आरोपी के पूर्व के आपराधिक रिकॉर्ड को भी देखे। इन तीनों अधिकारियों ने अदालत में आरोपियों का यह रिकॉर्ड पेश नहीं किया। जिससे सरकार की त्रिस्तरीय निरीक्षण की व्यवस्था को इन अधिकारियों की अकर्मण्यता से समाप्त कर दिया गया।
मामले के अनुसार कानोता थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के गत दिनों घर में घुसकर चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिसका आरोप पत्र गत दिनों पुलिस ने अदालत में पेश किया। वहीं दोनों आरोपियों की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र पेश कर रिहा करने की गुहार की गई। सुनवाई के दौरान एपीपी महावीरसिंह किशनावत के जरिए अदालत को पता चला कि पुलिस ने आरोप पत्र के साथ दोनों आरोपियों के पूर्व में किए अपराधों के संबंध में जानकरी ही नहीं दी गई। इस पर अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए तीनों संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कमिश्नर और डीजीपी को आदेश दिए हैं।