राजस्थान हाईकोर्ट ने गोपालपुरा की कृष्णा विहार कॉलोनी में हुए अतिक्रमण के मामले में जेडीए की ओर से 13 साल तक जवाब पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने जेडीए पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाते हुए इसकी वसूली दोषी अफसरों से कर पन्द्रह दिन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा कराने को कहा है। इसके साथ ही अदालत ने जोन-5 के उपायुक्त के खिलाफ स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए अवमानना नोटिस जारी किए हैं।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश कृष्णा विहार विकास समिति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता संजय शर्मा ने अदालत को बताया कि वर्ष 2002 में याचिकाकर्ता की ओर से अतिक्रमण को लेकर जेडीए कोर्ट में याचिका दायर की थी। जेडीए कोर्ट ने इस संबंध में जेडीए के संबंधित अधिकारी को विवाद तय करने को कहा था। कार्रवाई नहीं होने पर वर्ष 2004 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जिसमें जेडीए की ओर से आज तक जवाब पेश नहीं किया गया।
जेडीए की ओर से आज सुनवाई के दौरान जवाब पेश करने के लिए एक बार फिर समय मांगा गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए जेडीए पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगा दिया। इसके अलावा आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर जोन-5 के उपायुक्त के खिलाफ स्वप्रेरित अवमानना का प्रसंज्ञान लिया है।