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नहीं माने 'भगवान', गई भंवरी की जान

Mon, 18 Sep 2017 06:49 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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जयपुर के कांवटिया अस्पताल में मरीजों की भीड़ - फोटो : amar ujala
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सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। सड़क हादसे में घायल एक महिला को इस हड़ताल के कारण समय पर इलाज नहीं मिला और उसकी मौत हो गई। 
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अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत सेवारत डॉक्टरों ने आज हड़ताल कर दी। राज्य सेवारत चिकित्सक संघ के बैनर तले डॉक्टरों ने अस्पतालों के कार्य बहिष्कार करने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। उन्हें इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। उनकी यह हड़ताल मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है। 

नागौर के जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिलने से सड़क दुर्घटना में घायल हुई महिला की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि लाडनूं थाना इलाके में बाइक पर सवार होकर महिला समेत तीन जने कहीं जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कार चालक ने बाइक को टक्कर मार दी। इससे हुड़ास का रहने वाला लिछमनराम, उसकी पत्नी भंवरी देवी और बेटा सूरजमल घायल हो गए। आसपास मौजूद लोग तीनों को नागौर के जेएलएन अस्पताल लेकर आए, जहां इलाज के अभाव में भंवरी देवी की मौत हो गई।
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डॉक्टरों का ये है कहना

खाली पड़े डॉक्टरों के कमरे और बाहर मरीज - फोटो : amar ujala
राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर आज एक दिन के लिए प्रदेश के सभी सेवारत चिकित्सक सामूहिक अवकाश पर हैं। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि सेवारत चिकित्सकों की विभिन्न मांगों को लेकर चिकित्सा मंत्री को प्रदेश के 33 जिलों का 33 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया था।

मांगपत्र की प्रमुख मांगों को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई वार्ता में 29 अगस्त को सैद्वांतिक सहमति बनी थी। इसके बाद सरकार ने 15 दिन का समय मांगा।
इसके बाद भी सकारात्मक रूख नहीं अपनाने पर मजबूरन डॉक्टर्स को हड़ताल करनी पड़ी।
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